क्या जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन और आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को योगी कैबिनेट की मंजूरी मिली?

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क्या जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन और आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को योगी कैबिनेट की मंजूरी मिली?

सारांश

केंद्र सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन किया है जबकि आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को मंजूरी दी है। यह निर्णय उच्च शिक्षा में सुधार लाने के लिए महत्वपूर्ण है। जानें विस्तार से इस खबर के पीछे की कहानी और इसके असर के बारे में।

Key Takeaways

  • जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन अनियमितताओं के कारण हुआ।
  • आईआईएमटी विश्वविद्यालय का ऑफ-कैंपस उच्च शिक्षा में नए अवसर सृजित करेगा।
  • सरकार ने शिक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए गंभीर कदम उठाए हैं।

लखनऊ, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाले प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। एक तरफ, योगी कैबिनेट ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (जनपद फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दी है, तो वहीं आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकारी पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

जेएस विश्वविद्यालय के परिसमापन के प्रस्ताव की मंजूरी के निर्णय की जानकारी देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैक डेट में मार्कशीट व डिग्रियां जारी की गईं, जिनका उपयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया।

इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस की जांच, कुलाधिपति एवं कुलसचिव की गिरफ्तारी तथा शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। मंत्री ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है, जिसमें डिग्री प्रदान करने की शक्ति का दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं एवं डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना शामिल है। इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत योगी सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद के परिसमापन का निर्णय लिया है।

परिसमापन के पश्चात विश्वविद्यालय के समस्त अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे तथा इन्हीं अभिलेखों के आधार पर पूर्व में निर्गत मार्कशीट एवं डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही, परिसमापन अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55(6) के अंतर्गत त्रि-सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया है। कैबिनेट बैठक में दूसरा अहम निर्णय आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा में ऑफ-कैंपस की स्थापना के संबंध में लिया गया।

इसके लिए संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस ऑफ-कैंपस के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे और छात्रों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 तथा उसके द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2021 के अंतर्गत परिसर दूरस्थ केंद्र की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इस क्रम में प्रायोजक संस्था एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मेरठ द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 4.796 एकड़ भूमि चिह्नित की गई थी, जिसके लिए 25 फरवरी 2025 को आशय पत्र (एलओआई) निर्गत किया गया था। अब सरकार द्वारा आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा स्थित ऑफ-कैंपस के संचालन के लिए प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।

मंत्री ने कहा कि इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

Point of View

जबकि आईआईएमटी का ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन क्यों हुआ?
जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन विभिन्न अनियमितताओं के कारण हुआ, जिसमें फर्जी डिग्रियां जारी करना शामिल है।
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस का क्या महत्व है?
यह ऑफ-कैंपस पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर प्रदान करेगा।
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