क्या जस्टिस एमएस सौनक बने झारखंड हाईकोर्ट के 18वें चीफ जस्टिस?
सारांश
Key Takeaways
- महेश शरदचंद्र सोनक झारखंड के 18वें चीफ जस्टिस बने।
- राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उन्हें शपथ दिलाई।
- जस्टिस सोनक का न्यायिक अनुभव बॉम्बे हाईकोर्ट में रहा है।
- उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
- लिविंग विल को दर्ज कराने वाले पहले व्यक्ति बने।
रांची, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक ने शुक्रवार को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। यह शपथ रांची के लोकभवन के बिरसा मंडप में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा दिलाई गई। इसके साथ ही, वे झारखंड के 18वें चीफ जस्टिस बन गए।
मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी चीफ जस्टिस की नियुक्ति संबंधी वारंट को हिंदी और अंग्रेजी में पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीश, झारखंड सरकार के कई मंत्री, महाधिवक्ता राजीव रंजन, जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक के परिजन और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जस्टिस सोनक इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। उनका जन्म 28 नवंबर 1964 को हुआ था। जस्टिस सोनक ने गोवा के पणजी स्थित डॉन बॉस्को हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद धेम्पे कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस से बीएससी और एमएस कॉलेज ऑफ लॉ, पणजी से प्रथम श्रेणी में एलएलबी की डिग्री हासिल की।
इसके अलावा, उन्होंने जेवियर सेंटर ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च से पुर्तगाली भाषा में डिप्लोमा भी प्राप्त किया। अक्टूबर 1988 में जस्टिस सोनक महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की पणजी पीठ में विभिन्न कानूनी क्षेत्रों में व्यापक प्रैक्टिस की।
वे केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता और राज्य सरकार तथा वैधानिक निगमों के विशेष अधिवक्ता भी रह चुके हैं। जस्टिस सोनक न्यायिक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक और मानवीय मुद्दों के प्रति भी जागरूक हैं। उन्होंने गोवा में “लिविंग विल” या एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव दर्ज कराने वाले पहले व्यक्ति बनने का गौरव प्राप्त किया। जस्टिस सोनक के पूर्व झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान 8 जनवरी को सेवानिवृत्त हो गए। उन्हें गुरुवार को हाईकोर्ट में आयोजित एक समारोह में भावपूर्ण विदाई दी गई।