क्या जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में स्पीकर की समिति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं?

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क्या जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में स्पीकर की समिति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं?

सारांश

क्या जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में लोकसभा स्पीकर की समिति को चुनौती दी है? यह मामला संसद में जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया से जुड़ा है। जानें इस गंभीर मामले की पूरी कहानी और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया।

Key Takeaways

  • जस्टिस यशवंत वर्मा ने समिति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को सुनवाई तय की है।
  • जस्टिस वर्मा का मानना है कि मौजूदा प्रक्रिया गलत है।
  • आग लगने की घटना के बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर किया गया।
  • यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। 'कैश कांड' मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय समिति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला संसद में जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया से संबंधित है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सचिवालय को नोटिस जारी किया है और उनसे 7 जनवरी तक जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले को जनवरी के पहले हफ्ते में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या कानून बनाने वालों को यह भी नहीं पता कि ऐसा नहीं किया जा सकता?

जस्टिस वर्मा का तर्क है कि संसद द्वारा अपनाई गई मौजूदा प्रक्रिया गलत है। उनका कहना है कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत किसी जज को हटाने की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है, जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन प्रस्ताव को स्वीकार करें और उसके बाद एक संयुक्त समिति का गठन किया जाए। लेकिन इस मामले में केवल लोकसभा ने प्रस्ताव पारित किया है, जबकि राज्यसभा में यह प्रस्ताव अभी लंबित है।

जस्टिस वर्मा का यह भी कहना है कि 21 जुलाई को जब दोनों सदनों में उन्हें हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था, तब आगे की जांच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति बननी चाहिए थी। ऐसे में केवल लोकसभा स्पीकर द्वारा समिति का गठन करना कानून के खिलाफ है।

गौरतलब है कि इस साल जज जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में 14-15 मार्च की रात आग लगने की घटना सामने आई थी। आग बुझाने के दौरान फायर सर्विस को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां मिलीं, जिनके वीडियो भी वायरल हुए थे। उस समय जज वर्मा बंगले में मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस व फायर विभाग को सूचना दी।

जांच में यह कैश अनएकाउंटेड बताया गया। घटना के एक हफ्ते बाद जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया, जहां उन्हें फिलहाल कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है।

Point of View

बल्कि यह संसद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है। जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका से यह स्पष्ट होता है कि उन्हें उचित प्रक्रिया का पालन न होने की चिंता है। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पारदर्शिता से हों और किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित समिति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
इस मामले की सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को 7 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया है।
जस्टिस वर्मा का तर्क क्या है?
जस्टिस वर्मा का तर्क है कि संसद द्वारा अपनाई गई मौजूदा प्रक्रिया गलत है और इसे सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
क्या इस मामले में कोई राजनीतिक प्रभाव है?
हाँ, यह मामला राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न्यायपालिका और विधायिका के बीच के संबंधों को प्रभावित करता है।
क्या जस्टिस वर्मा पर कोई आरोप हैं?
जस्टिस वर्मा पर आरोप हैं कि उनके सरकारी बंगले में आग लगने के दौरान जले हुए नोट मिले थे, जिन्हें अनएकाउंटेड बताया गया।
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