क्या देवी सरस्वती का अद्भुत शृंगार और 'अक्षर अभ्यासम' दक्षिण भारत के मंदिरों में बसंत पंचमी पर मनाया जाता है?
सारांश
Key Takeaways
- बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है।
- दक्षिण भारत के मंदिरों में अद्भुत आयोजन होते हैं।
- 'अक्षर अभ्यासम' बच्चों के लिए महत्वपूर्ण संस्कार है।
- मंदिरों में मां सरस्वती का विशेष शृंगार किया जाता है।
- यह पर्व ज्ञान और कला की आराधना का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा का पर्व बसंत पंचमी 23 जनवरी को पूरे देश में मनाया जाएगा। इस दिन को मनाने के विभिन्न तरीके हैं, जो उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के मंदिरों में विशेष अनुष्ठानों के रूप में प्रकट होते हैं।
आज हम आपको दक्षिण भारत के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां विशेष रूप से मां सरस्वती की कृपा के लिए अनूठे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध सरस्वती मंदिरों में से एक, तेलंगाना के बासर में स्थित ज्ञान सरस्वती मंदिर में विशेष आयोजन होता है। बसंत पंचमी के दिन यहाँ 'अक्षर अभ्यासम' की रस्म अदा की जाती है, जिसमें माता-पिता अपने बच्चों को लेकर मंदिर जाते हैं और मां सरस्वती के समक्ष पहला अक्षर लिखवाते हैं। इसे बच्चों की शिक्षा की नींव के रूप में देखा जाता है।
दूसरे स्थान पर कर्नाटक का शृंगेरी शारदा पीठम है, जहां बसंत पंचमी पर विशेष 'अभिषेकम' और संगीत सभाओं का आयोजन होता है और मां सरस्वती को पिछले वस्त्र और सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। यह मंदिर मां सरस्वती के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है।
तीसरे स्थान पर तेलंगाना का विद्या सरस्वती मंदिर है, जहां बसंत पंचमी का उत्सव भव्य तरीके से मनाया जाता है। यहां विशेष पूजा का आयोजन उन बच्चों के लिए किया जाता है जो मूल नक्षत्र में पैदा हुए हैं, और मां का अद्भुत शृंगार भी किया जाता है।
चौथे स्थान पर कर्नाटक के कोल्लूर में स्थित मूकाम्बिका मंदिर है। यह मंदिर विशेष है क्योंकि यहां मां मूक बच्चों की माता के रूप में विराजमान हैं और ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं। इस मंदिर में नवजात बच्चों की जीभ पर ओम लिखने की प्रथा भी है।
पांचवे और अंतिम मंदिर के रूप में तमिलनाडु का कूटनूर महासरस्वती मंदिर आता है। बसंत पंचमी के दिन यहां 'विद्योत्सव' का आयोजन होता है, जहां छात्रों को अपनी कला और निपुणता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। भक्त मां को वाद्य यंत्र और कलम अर्पित करते हैं।