क्या अखिलेश यादव ने मणिकर्णिका घाट को लेकर सरकार को घेरने का किया प्रयास?
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव ने मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ को लेकर सरकार को घेरा।
- सरकार के बयानों में विरोधाभास था।
- आस्थास्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई।
- झूठे बयानों से जनता के बीच सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।
- सपा काशी की पौराणिकता और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
लखनऊ, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने काशी में कॉरिडोर के नाम पर मणिकर्णिका घाट पर हुई तोड़फोड़ के मामले में सरकार और प्रशासन पर कड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सत्ताधारी पक्ष की भाषा और बयानों ने उनके झूठ को उजागर कर दिया है।
एक तरफ ‘मुख्य’ अधिकारी कहते हैं कि ‘कुछ नहीं हुआ,’ वहीं दूसरी ओर ‘अपर’ अधिकारी गोलमोल जवाब देते हैं कि ‘कुछ था।’ यही झूठ की सबसे बड़ी समस्या है कि उसके दो रूप होते हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि शासन-प्रशासन को चाहिए कि सच छुपाने से पहले आपस में बैठकर तय कर लें कि झूठा बयान क्या देना है, अन्यथा इस तरह के विरोधाभासी बयानों से झूठ की सच्चाई सामने आ जाती है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसे बयानों से जनता के बीच सरकार की खिल्ली उड़ती है और अधिकारियों को भी नजरें चुरानी पड़ती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस शासन में संवेदनशील आस्थास्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और इसे छुपाने के लिए भ्रमित करने वाले बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर शासन-प्रशासन को झूठ बोलने में दिक्कत हो रही है तो इसके लिए एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप बना लेना चाहिए, ताकि सभी एक ही भाषा में बोल सकें।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी काशी की पौराणिकता, संस्कृति और आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी और इस मुद्दे पर सरकार को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।