मासिक कालाष्टमी: कालभैरव की उपासना का महत्वपूर्ण दिन, शुभ-अशुभ समय जानें

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मासिक कालाष्टमी: कालभैरव की उपासना का महत्वपूर्ण दिन, शुभ-अशुभ समय जानें

सारांश

जानें मासिक कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा का महत्व और इस दिन के शुभ एवं अशुभ समय।

Key Takeaways

  • मासिक कालाष्टमी पर विशेष पूजा का महत्व है।
  • शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखें।
  • भक्तों के लिए व्रत रखना अनिवार्य है।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का महत्व।
  • अशुभ समय से बचने के उपाय।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्रीय प्रेस)। सनातन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है। इसके पांच अंगों (नक्षत्र, वार, तिथि, करण और योग) के आधार पर ही दिन का प्रारंभ और शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। शुक्रवार (10 अप्रैल) को बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आएगी। इस दिन कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व है, जिसे मासिक कालाष्टमी के नाम से जाना जाता है।

यह दिन काला अष्टमी के नाम से भी मशहूर है। यह तिथि हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। इस दिन कालभैरव के भक्त उनकी विशेष पूजा करते हैं और उपवास भी रखते हैं। भक्त इस दिन कालभैरव की कृपा प्राप्त करने के लिए पूरा दिन व्रत रखकर उनकी आराधना करते हैं।

दृक पंचांग के अनुसार 10 अप्रैल को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 1 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा। इस दिन अष्टमी तिथि रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, हालाँकि उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन अष्टमी का ही मान होगा। नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लगेगा। योग शिव शाम 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। करण बालव सुबह 10 बजकर 21 मिनट तक और कौलव रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

शुक्रवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक होगा। अमृत काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय का भी ध्यान रखना आवश्यक है। इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक होगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट तथा दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। आडल योग सुबह 6 बजकर 1 मिनट से 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। वर्ज्य समय शाम 8 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 56 मिनट तक होगा।

Point of View

भक्तों को कालभैरव की पूजा करने का अवसर मिलता है, जो हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में गहरी जड़ें रखता है। यह दिन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और आस्था का प्रतीक है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

मासिक कालाष्टमी का महत्व क्या है?
यह दिन कालभैरव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है, जो भक्तों को विशेष आशीर्वाद देता है।
कब है मासिक कालाष्टमी?
मासिक कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।
शुभ मुहूर्त कब है?
शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:31 से 5:16 तक रहेगा।
अशुभ समय कब है?
इस दिन राहुकाल सुबह 10:47 से 12:23 तक रहेगा।
कालभैरव की पूजा कैसे करें?
भक्त व्रत रखकर और विशेष पूजा सामग्री के साथ कालभैरव की आराधना करते हैं।
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