कानपुर फर्जी मार्कशीट मामला: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रिमांड ऑर्डर निरस्त कर सभी आरोपियों को रिहा किया
सारांश
Key Takeaways
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कानपुर के बहुचर्चित फर्जी मार्कशीट मामले में किदवई नगर पुलिस को बड़ा झटका देते हुए रिमांड ऑर्डर और अरेस्ट मेमो निरस्त कर दिए हैं। न्यायालय ने पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए सभी आरोपियों को तत्काल रिहा करने का आदेश 30 अप्रैल को जारी किया। यह आदेश उस मामले में आया है जिसमें पुलिस ने 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की एक हजार से अधिक फर्जी मार्कशीट और डिग्रियाँ बरामद करने का दावा किया था।
मामले का पृष्ठभूमि और छापेमारी
किदवई नगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही गौशाला स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापेमारी करके कथित फर्जी मार्कशीट गिरोह का भंडाफोड़ किया था। मौके से पुलिस ने 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज और अलीगढ़ के जामिया उर्दू कॉलेज की एक हजार से अधिक मार्कशीट व डिग्रियाँ बरामद की थीं।
बरामद दस्तावेज़ों में बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी जैसी व्यावसायिक डिग्रियों के साथ-साथ हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट भी शामिल थीं। पुलिस ने इस मामले में शैलेंद्र कुमार ओझा, नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र, अश्वनी कुमार सिंह और नोएडा विनीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
एसआईटी जाँच में सामने आए तथ्य
पुलिस ने दावा किया था कि यह गिरोह पिछले एक दशक से अधिक समय से सक्रिय था और गिरोह के कथित सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिले थे। जाँच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह लोगों को बिना परीक्षा दिए डिग्रियाँ उपलब्ध कराता था और इसके लिए मोटी रकम वसूली जाती थी।
एसआईटी की जाँच में एशियन यूनिवर्सिटी से जुड़ी 284 डिग्रियों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने रोल नंबर मिलान के बाद स्पष्ट किया कि ये डिग्रियाँ कभी जारी ही नहीं की गई थीं। इसके अतिरिक्त, सिक्किम प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की तीन में से दो डिग्रियाँ और अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर स्थित हिमालयन यूनिवर्सिटी की एक डिग्री भी जाँच में फर्जी पाई गई थी।
एसआईटी ने डिग्रियाँ, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर को सत्यापन के लिए सौंपे थे।
हाई कोर्ट का आदेश और पुलिस पर नाराज़गी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लचर बताते हुए रिमांड ऑर्डर और अरेस्ट मेमो दोनों निरस्त कर दिए। न्यायालय ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि यह आदेश उस समय आया है जब एसआईटी की जाँच अभी पूरी नहीं हुई थी और सत्यापन प्रक्रिया जारी थी।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज़ों से जुड़े मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। न्यायालय का यह निर्णय संकेत देता है कि गिरफ्तारी की प्रक्रियागत खामियाँ आरोपियों को राहत दिला सकती हैं, भले ही मूल आरोप गंभीर हों।
आगे क्या होगा
आरोपियों की रिहाई के बाद अब यह देखना होगा कि कानपुर पुलिस और एसआईटी इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं। छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी में सत्यापन प्रक्रिया अभी जारी है, जिसके नतीजे मामले की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस को प्रक्रियागत खामियों को दूर कर नए सिरे से ठोस साक्ष्य के साथ न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना होगा।