कांशीराम जयंती पर मायावती ने श्रद्धांजलि अर्पित की, बसपा आंदोलन में शामिल होने का किया आह्वान
सारांश
Key Takeaways
- कांशीराम का जीवन सामाजिक न्याय के लिए समर्पित था।
- मायावती ने श्रद्धांजलि अर्पित की और आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।
- जातीय एकता को बढ़ावा देना कांशीराम का मुख्य लक्ष्य था।
- बहुजन समाज के लोगों को मास्टर चाबी हासिल करने की आवश्यकता है।
- भीम आर्मी के नेता ने कांशीराम को श्रद्धांजलि दी।
लखनऊ, १५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपना सम्पूर्ण जीवन बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की विचारधारा और आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित किया।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम को उनकी जयंती पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में उनके अनुयायियों की ओर से शत-शत नमन और श्रद्धांजलि। कांशीराम ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की विचारधारा को जीवित रखते हुए सत्ता की मंजिल तक पहुँचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।"
बसपा प्रमुख ने आगे कहा, "उन्होंने जाति के आधार पर विभाजित लोगों को 'बहुजन समाज' की एकता में जोड़ने के ऐतिहासिक कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने बसपा के 'सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति' आंदोलन को दृढ़ता से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।"
मायावती ने बहुजन समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे बसपा आंदोलन से जुड़कर एक ईमानदार अंबेडकरवादी बनें और अपने वोट की ताकत से सत्ता की 'मास्टर चाबी' हासिल करें। उन्होंने कहा कि इससे संविधान में बहुजनों के हितों की सुरक्षा के लिए दिए गए अधिकारों को लागू किया जा सकेगा।
उन्होंने जोर दिया कि इससे बहुजन समाज के लोग गुलामी और लाचारी से मुक्त होकर सुखद जीवन जी सकेंगे, जो कांशीराम का मिशन और जीवन संदेश था।
भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर ने भी कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, "कांशीराम साहब, आपकी नेक कमाई, आपने सोती कौम जगाई।" उन्होंने आगे कहा, "बहुजन नायक कांशीराम की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के छठवें स्थापना दिवस की सभी को बधाई।"