बेंगलुरु: 'बुरी आत्मा भगाने' के बहाने महिला से बलात्कार के आरोप में पुजारी गिरफ्तार, जानकारी लीक करने वाला कांस्टेबल सस्पेंड
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु के जेपी नगर इलाके से पुजारी सतीश पात्री को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने बुरी आत्माओं को भगाने का झाँसा देकर एक महिला के साथ कई बार बलात्कार किया। इस मामले में चिक्कमगलुरु जिले के एनआर. पुरा पुलिस स्टेशन से जुड़े कांस्टेबल कांतेश को भी निलंबित किया गया है, जिस पर आरोपी को जाँच से संबंधित जानकारी लीक कर उसे गिरफ्तारी से बचाने में मदद करने का आरोप है।
घटनाक्रम: कैसे दिया गया धोखा
पुलिस के अनुसार, सतीश पात्री ने पीड़ित महिला के परिवार को यह विश्वास दिलाया कि वह उसे बुरी आत्माओं के साये से मुक्त करा सकता है। इसी बहाने वह उसे चिक्कमगलुरु जिले के मेदनाहकलु गाँव ले गया, जहाँ कथित तौर पर दुर्गापरमेश्वरी मंदिर ले जाने का नाटक करते हुए उसने यौन शोषण किया। इसके बाद आरोपी उसे शिवमोगा जिले के तीर्थहल्ली के निकट कुदुरेगुंडी भी ले गया, जहाँ कथित तौर पर यही अपराध दोहराया गया।
एक महीने तक फरार रहा आरोपी
शिकायत दर्ज होने के बाद सतीश पात्री करीब एक महीने तक फरार रहा। जाँच में यह भी सामने आया कि उसे पुलिस विभाग के भीतर से ही सूचना मिल रही थी, जिससे वह हर बार पुलिस के पहुँचने से पहले ठिकाना बदल लेता था। अंततः कोप्पा पुलिस को बेंगलुरु में उसके छिपे होने की सूचना मिली और एक विशेष अभियान चलाकर उसे जेपी नगर से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिसकर्मी पर आरोप और निलंबन
जाँच के दौरान पता चला कि एनआर. पुरा पुलिस स्टेशन के कांस्टेबल कांतेश ने आरोपी को मामले की संवेदनशील जानकारी साझा की और पुलिस दल के पहुँचने से पहले उसे सतर्क किया। इस कारण आरोपी बार-बार पकड़ से बच निकलता रहा। लीक के आरोपों की जाँच के बाद चिक्कमगलुरु के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार दयामा ने कांस्टेबल को तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया।
कानूनी धाराएँ और पुराना मामला
पुलिस ने एनआर. पुरा पुलिस स्टेशन में 'कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं और काले जादू की रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम, 2017' के तहत मामला दर्ज किया है, जबकि कोप्पा पुलिस ने बलात्कार का आरोप लगाया है। प्रारंभिक जाँच में एक पुराना मामला भी सामने आया, जिसमें आरोपी पर एक नाबालिग लड़की के साथ भी इसी तरह के व्यवहार का आरोप था। इसके बाद सोशल मीडिया पर आरोपी से जुड़े वीडियो वायरल हो गए, जिससे जनता में व्यापक आक्रोश फैल गया।
आगे की जाँच
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है और आरोपी की अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। यह घटना अंधविश्वास की आड़ में होने वाले अपराधों और पुलिस तंत्र में भ्रष्टाचार, दोनों को एकसाथ रेखांकित करती है — एक ऐसे समय में जब कर्नाटक में महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज है।