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क्या काशी तमिल संगमम 4.0 ने काशी और तमिलनाडु की संस्कृति को एकजुट किया?

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क्या काशी तमिल संगमम 4.0 ने काशी और तमिलनाडु की संस्कृति को एकजुट किया?

सारांश

रामेश्वरम में आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 ने तमिलनाडु और काशी की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित किया। छात्रों ने साझा संस्कृति के महत्व को बताया और प्रधानमंत्री मोदी की पहल की सराहना की। क्या यह कार्यक्रम उत्तर-दक्षिण के बीच की सांस्कृतिक खाई को भरने में सफल होगा?

मुख्य बातें

काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक एकता का महत्व।
भाषाई भेदभाव को समाप्त करने के लिए कार्यक्रम का उद्देश्य।
छात्रों का अनुभव और सीखने का अवसर।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल की सराहना।
उत्तर-दक्षिण के बीच सांस्कृतिक सेतु की भूमिका।

रामेश्वरम, 30 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु में आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 के अंतर्गत रामेश्वरम पहुँचे प्रतिभागियों ने काशी और तमिलनाडु की साझा सांस्कृतिक विरासत को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया।

कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के छात्र अंकुश गुप्ता ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि मैं काशी तमिल संगमम 4.0 के माध्यम से तमिल भाषा और संस्कृति को समझने यहाँ आया हूँ। यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया है।

छात्र अंकुश ने कहा कि काशी और तमिलनाडु प्राचीन संस्कृति के एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जो आज तक अनवरत चली आ रही हैं। चाहे कांची हो या काशी, प्रयाग हो या कुंभकोणम—दोनों संस्कृतियां आपस में गहराई से जुड़ी हैं। भाषा कभी बाधा नहीं रही है। जैसे उत्तर भारत में मैथिली शरण गुप्त हैं, वैसे ही दक्षिण में सुब्रमण्यम भारती हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, IIT मद्रास और IIT बीएचयू का आभार व्यक्त किया।

बीएचयू के छात्र आशुतोष ने बताया कि काशी से करीब 300 छात्र-छात्राएं तमिलनाडु आए थे। उन्होंने कहा, “काशी तमिल संगमम की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी है। इस कार्यक्रम ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य किया है। आज के समय में भाषा और क्षेत्र के नाम पर जो भेदभाव देखने को मिलता है, ऐसे कार्यक्रम उसे समाप्त करने में मदद करते हैं। हमने यहाँ 10 दिन बिताए, इस दौरान तमिल भाषा सीखने और यहाँ की संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिला।”

बीएचयू की छात्रा प्रिया कुमारी ठाकुर ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रामेश्वरम में आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 कार्यक्रम के दौरान उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करना चाहूंगी, जिनकी पहल से हमें तमिल भाषा और संस्कृति को समझने का अवसर मिला।”

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक समृद्धि की ओर भी प्रेरित करता है। भारत की विविधता में एकता का यह एक बेहतरीन उदाहरण है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी तमिल संगमम 4.0 का उद्देश्य क्या है?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ना और भाषाई भेदभाव को समाप्त करना है।
इस कार्यक्रम में कितने छात्रों ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम में लगभग 300 छात्रों ने भाग लिया, जो काशी से तमिलनाडु आए थे।
प्रधानमंत्री मोदी का इस कार्यक्रम में क्या योगदान है?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम की नींव रखी और इसे सांस्कृतिक सेतु के रूप में स्थापित किया।
राष्ट्र प्रेस
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