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क्या काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि देते हुए मोहन भागवत ने स्वयंसेवक बनने का संदेश दिया?

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क्या काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि देते हुए मोहन भागवत ने स्वयंसेवक बनने का संदेश दिया?

सारांश

बिलासपुर में काशीनाथ गोरे की स्मारिका विमोचन के अवसर पर मोहन भागवत ने अद्भुत संदेश दिया। उन्होंने सभी को स्वयंसेवक बनने की प्रेरणा दी। जानिए इस कार्यक्रम की खास बातें।

मुख्य बातें

काशीनाथ गोरे के स्मारिका का विमोचन किया गया।
मोहन भागवत ने स्वयंसेवक बनने का संदेश दिया।
संघ की 100 वर्ष की यात्रा का उल्लेख।
लोकहित के लिए कार्य करने की प्रेरणा।
समाज में सेवा की भावना को बढ़ावा।

बिलासपुर, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लोकहितकारी स्वर्गीय काशीनाथ गोरे के स्मारिका का विमोचन करने के लिए सिम्स ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने भारतमाता की तस्वीर पर पुष्प अर्पण कर नमन किया। इसके उपरांत, मोहन भागवत ने स्मारिका का विमोचन किया।

संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके लोकहित कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आजकल आरएसएस के 100 वर्षों की बात होती है, लेकिन ये 100 वर्ष यहाँ तक कैसे पहुँचे, यह लोगों को नहीं पता। स्वयंसेवकों ने सभी बाधाओं के साथ अपने संपर्क को बढ़ाया और संघ को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवक शुद्धता, कर्मठता और अनुशासन के साथ लगातार लोगों के संपर्क में रहकर सेवा करते हैं। अपने कुटुंब की शुरुआत अपने घर से करते हुए, फिर पड़ोस और अंततः पूरे देश के लिए कार्य करते हैं। इसलिए हम कहते हैं 'वसुधैव कुटुम्ब'। ऐसा ही होता है स्वयंसेवक।

उन्होंने कहा कि काशीनाथ भी एक लोकहितकारी स्वयंसेवक थे जिन्होंने हर जगह अपने धर्म का पालन किया। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि यह आवश्यक नहीं कि हर कोई काशीनाथ बने, लेकिन सभी को स्वयंसेवक बनना चाहिए।

इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्वर्गीय काशीनाथ गोरे को श्रद्धांजलि दी और उनकी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वे प्रैक्टिसिंग डॉक्टर थे, तब काशीनाथ ने उन्हें एक देवार मोहल्ले में ले जाकर ठेले में बैठाया, जहां चारों ओर सूअर थे।

उन्होंने कहा कि वे शनिवार को वहां जाकर बच्चों और लोगों के इलाज का प्रबंध करते थे। मजाक करते हुए उन्होंने कहा कि उस दिन से लोग मुझे शनिचर डॉक्टर कहने लगे और मेरा भाग्य जाग गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कार्यक्रम न केवल काशीनाथ गोरे की विरासत को सम्मानित करता है, बल्कि समाज में स्वयं सेवा की भावना को भी बढ़ावा देता है। ऐसे कार्यक्रम हमारी संस्कृति और सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशीनाथ गोरे कौन थे?
काशीनाथ गोरे एक प्रसिद्ध लोकहितकारी स्वयंसेवक थे जो समाज सेवा में सक्रिय रहे।
मोहन भागवत ने क्या संदेश दिया?
मोहन भागवत ने सभी को स्वयंसेवक बनने की प्रेरणा दी और काशीनाथ गोरे के कार्यों की सराहना की।
इस कार्यक्रम का महत्व क्या है?
यह कार्यक्रम काशीनाथ गोरे की श्रद्धांजलि है और स्वयं सेवा की भावना को प्रोत्साहित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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