शारदीय नवरात्रि तीसरा दिन: कटरा से मिर्जापुर तक मां चंद्रघंटा के जयकारों से गूंजे शक्तिपीठ
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन, 13 अक्टूबर 2026 को, देशभर के प्रमुख शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर से लेकर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में माता विंध्यवासिनी धाम तक — 'जय माता दी' के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। नवरात्रि का यह तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की उपासना को समर्पित है।
वैष्णो देवी में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों की संयुक्त निगरानी में भक्त व्यवस्थित कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
बिहार के नालंदा जिले से आए श्रद्धालु आशीष कुमार ने कहा, 'मां का बुलावा आया है और मैं पूरे उमंग के साथ दर्शन करने आया हूं। मैं पहले भी आता रहा हूं, लेकिन नवरात्रि में यह मेरा पहला मौका है। माता के दर्शन कर अपने बिहार वासियों के लिए सुख-शांति की कामना करूंगा।'
मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालु सचिन प्रजापति अपने भाइयों पवन प्रजापति और बंटी प्रजापति के साथ मंदिर पहुंचे। सचिन ने बताया कि वे इसी वर्ष तीसरी बार आए हैं, हालांकि शारदीय नवरात्रि में यह उनकी पहली यात्रा है। उन्होंने भवन की फूलों और रोशनी से की गई सजावट की भी खूब प्रशंसा की।
प्रयागराज के मां ललिता देवी मंदिर में भक्तिमय माहौल
प्रयागराज के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां ललिता देवी मंदिर में सुबह मंगला आरती के साथ दर्शन-पूजन का आरंभ हुआ। भक्तों ने चुनरी, नारियल, फल-फूल और मिष्ठान अर्पित कर मां चंद्रघंटा से सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए।
श्रद्धालु नीलम प्रसाद पाल ने कहा, 'मां ललिता देवी का यह मंदिर बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है। सब लोग अपनी कामना लेकर मां के चरणों में आते हैं और मां सबकी मनोकामना पूरी करती हैं।'
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह शक्तिपीठ वह स्थान माना जाता है जहां पौराणिक मान्यता के अनुसार सती जी के हाथ की उंगलियां गिरी थीं। यहां मां काली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के तीन स्वरूप एक साथ विराजमान हैं। पुराणों में उल्लेख है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां एक कुंड का निर्माण किया और उसी के जल से भगवती की पूजा की थी।
नवरात्रि के दौरान मंदिर के पट प्रतिदिन प्रातः 5 बजे आरती के बाद खुलते हैं और रात 12 बजे शयन आरती के बाद बंद होते हैं। दिनभर दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन, श्रृंगार और भंडारे का आयोजन होता रहता है।
मिर्जापुर में विंध्यवासिनी धाम में लगा तांता
मिर्जापुर स्थित आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी धाम में भी तीसरे दिन श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। भक्त 'जय माता दी' के जयकारे लगाते हुए दर्शन और पूजन कर रहे थे। एक श्रद्धालु ने कहा, 'माता का दर्शन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। यहां सरकार की तरफ से व्यवस्था बहुत ही सुंदर है, किसी को कोई परेशानी नहीं हो रही।'
आस्था और परंपरा का संगम
शारदीय नवरात्रि का यह पर्व देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनकर उभरता है, जब उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक लाखों श्रद्धालु एक साथ शक्ति की आराधना में जुट जाते हैं। इस वर्ष भी तीर्थस्थलों पर भक्तों की संख्या उत्साहवर्धक रही, जो आने वाले दिनों में और बढ़ने की उम्मीद है।