13 अक्टूबर 2026
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शारदीय नवरात्रि: दतिया के मां पीतांबरा पीठ में उमड़ी भक्तों की भीड़, बगलामुखी-धूमावती दर्शन को देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

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शारदीय नवरात्रि: दतिया के मां पीतांबरा पीठ में उमड़ी भक्तों की भीड़, बगलामुखी-धूमावती दर्शन को देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

सारांश

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन दतिया के तांत्रिक शक्तिपीठ मां पीतांबरा पीठ में देशभर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। एक ही परिसर में मां बगलामुखी और मां धूमावती के दर्शन की दुर्लभ सुविधा इस पीठ को विशेष बनाती है, जिसके चलते नवरात्रि में यहाँ की भीड़ हर बार असाधारण रहती है।

मुख्य बातें

13 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन दतिया के मां पीतांबरा पीठ में देशभर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, बेंगलुरु और कोलकाता सहित अनेक राज्यों से भक्त दतिया पहुंचे।
इस पीठ की विशेषता — एक ही परिसर में मां बगलामुखी और मां धूमावती के एक साथ दर्शन होते हैं।
श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर पूजा-अर्चना की और परिसर में स्थित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया।
भक्तों ने बताया कि नवरात्रि के दौरान यह यात्रा उनके लिए धार्मिक आस्था और मानसिक शांति दोनों का स्रोत है।

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मध्य प्रदेश के दतिया स्थित विश्व प्रसिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ मां पीतांबरा पीठ में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की सुबह से ही मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर तक लंबी कतारें लग गईं, जब उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, बेंगलुरु और कोलकाता सहित देश के अनेक राज्यों से आए भक्त मां बगलामुखी और मां धूमावती के दर्शन के लिए यहाँ जुटे।

मुख्य घटनाक्रम

तड़के से ही मंदिर परिसर में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की भीड़ दर्शन की प्रतीक्षा में कतारबद्ध खड़ी रही। श्रद्धालु पूजा सामग्री, पीले फूल और प्रसाद लेकर पहुंचे। मां पीतांबरा को पीला रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसी वजह से बड़ी संख्या में भक्त पीले वस्त्र धारण किए दिखाई दिए।

कई परिवार एक दिन पूर्व ही दतिया पहुंच गए थे, ताकि प्रातःकाल के दर्शन का लाभ उठा सकें। नवरात्रि के तीसरे दिन देवी पूजन का विशेष धार्मिक महत्व मानने के कारण भक्तों में उत्साह और उमंग चरम पर रही।

दोनों देवियों के दर्शन का विशेष महत्व

पीतांबरा पीठ की विशिष्टता यह है कि एक ही परिसर में मां बगलामुखी और मां धूमावती — दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं, जो देश के अन्य शक्तिपीठों में दुर्लभ है। भक्तों की मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान इन दोनों देवियों की साधना और पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होती है।

श्रद्धालुओं ने बताया कि मां बगलामुखी को शत्रुहंता देवी के रूप में पूजा जाता है और उनकी आराधना से जीवन की बाधाओं व शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। वहीं मां पीतांबरा को राजसत्ता और मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में भी माना जाता है। भक्तों के अनुसार, अनेक राजनेता और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी सफलता और विजय की कामना लेकर यहाँ आते हैं।

वनखंडेश्वर महादेव में भी उमड़ी भीड़

मां पीतांबरा के दर्शन के साथ ही मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल अर्पित कर अभिषेक किया और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

मान्यता के अनुसार, पीतांबरा पीठ आने वाले भक्त परंपरागत रूप से मां के दर्शन के साथ वनखंडेश्वर महादेव के दर्शन भी करते हैं। नवरात्रि के दिनों में दोनों मंदिरों में एक साथ पूजन करने की प्रथा यहाँ वर्षों से चली आ रही है।

आम जनता पर असर और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

श्रद्धालुओं ने बताया कि मां पीतांबरा के दरबार में आकर उन्हें मानसिक शांति और नई आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। कई भक्तों ने कहा कि वे हर साल नवरात्रि के अवसर पर यहाँ अवश्य आते हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक संबल और आत्मिक संतुष्टि का भी माध्यम है।

भक्तों ने यह भी कहा कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना मां के दरबार में कभी व्यर्थ नहीं जाती — यह उनकी गहरी आस्था है।

क्या होगा आगे

दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ देश के प्रमुख तांत्रिक साधना केंद्रों में गिनी जाती है, जहाँ वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। नवरात्रि के शेष छह दिनों में भी भीड़ बनी रहने की संभावना है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों की व्यवस्था की जाती है। दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या इस शक्तिपीठ के प्रति लोगों की अटूट आस्था का प्रमाण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तंत्र साधना और लोकआस्था के अनूठे संगम का प्रतीक है — और नवरात्रि में यहाँ उमड़ने वाली भीड़ इसे राष्ट्रीय धार्मिक परिदृश्य पर एक महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में स्थापित करती है। एक ही परिसर में दो महाविद्याओं के दर्शन की दुर्लभता ने इस शक्तिपीठ को मध्य भारत के तीर्थ मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। यह भी उल्लेखनीय है कि भक्तों के अनुसार राजनेता और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भी यहाँ आते हैं — जो इस पीठ की सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। बड़ी संख्या में दूरदराज के श्रद्धालुओं का आना स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है, जिस पर नीतिनिर्माताओं का ध्यान जाना चाहिए।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां पीतांबरा पीठ दतिया क्यों प्रसिद्ध है?
मां पीतांबरा पीठ दतिया, मध्य प्रदेश में स्थित एक प्रमुख तांत्रिक शक्तिपीठ है, जो एक ही परिसर में मां बगलामुखी और मां धूमावती के दर्शन के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। यह दुर्लभ संयोग इसे देश के अन्य शक्तिपीठों से अलग और विशिष्ट बनाता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन पीतांबरा पीठ में क्या हुआ?
13 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन दतिया के मां पीतांबरा पीठ में देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर तक लंबी कतारें लगीं और भक्तों ने मां बगलामुखी, मां धूमावती एवं वनखंडेश्वर महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
मां बगलामुखी की आराधना का क्या महत्व है?
भक्तों की मान्यता है कि मां बगलामुखी शत्रुहंता देवी हैं और उनकी आराधना से जीवन की बाधाओं तथा शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। मां पीतांबरा को मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी और राजसत्ता से जोड़कर भी देखा जाता है।
पीतांबरा पीठ में नवरात्रि के दौरान कहाँ-कहाँ से श्रद्धालु आते हैं?
नवरात्रि के दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, बेंगलुरु और कोलकाता सहित देश के अनेक राज्यों से श्रद्धालु दतिया पहुंचते हैं। कई परिवार दर्शन के लिए एक दिन पहले ही दतिया आ जाते हैं।
वनखंडेश्वर महादेव मंदिर का पीतांबरा पीठ से क्या संबंध है?
वनखंडेश्वर महादेव मंदिर मां पीतांबरा पीठ के परिसर में ही स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। परंपरा के अनुसार, पीतांबरा पीठ आने वाले भक्त मां के दर्शन के साथ वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना भी करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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