क्या कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज 60 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए? : एसटी हसन

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क्या कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज 60 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए? : एसटी हसन

सारांश

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज को लेकर डॉ. एस.टी. हसन ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने 60 डेसिबल के नियम का पालन करने का सुझाव दिया है। कांवड़ पथ बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, ताकि कांवड़ियों की श्रद्धा और आम जनता की सुविधा दोनों का ध्यान रखा जा सके।

मुख्य बातें

डीजे की आवाज 60 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कांवड़ यात्रा के लिए कावड़ पथ बनाने की आवश्यकता है।
ध्वनि प्रदूषण से मरीजों को परेशानी होती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी है।
धार्मिक और सार्वजनिक हित का संतुलन आवश्यक है।

मुरादाबाद, 3 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने कांवड़ यात्रा के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा निश्चित रूप से एक धार्मिक यात्रा है, लेकिन जब इसमें तेज आवाज वाले डीजे बजते हैं, तो इससे आसपास के निवासियों को कठिनाई होती है। कांवड़ यात्रा के दौरान, जब यह डीजे बजते हैं, तो लोगों के मकानों की खिड़कियां झनझनाती हैं, और दिल के मरीज इसे सहन नहीं कर पाते।

एस.टी. हसन ने उत्तर प्रदेश सरकार और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लेख करते हुए कहा कि डीजे की आवाज 60 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि यह नियम लागू किया जाए तो किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि सरकार को कांवड़ यात्रा के लिए एक विशेष सड़क बनानी चाहिए, जिसे ‘कावड़ पथ’ कहा जाए। यह सड़क हरिद्वार से मुरादाबाद, बरेली और गढ़ तक पहुंचनी चाहिए, ताकि कांवड़ियों को सुविधा मिले और आम जन को असुविधा न हो। इससे न तो कांवड़ियों की श्रद्धा प्रभावित होगी और न ही जनता को परेशानी होगी। डीजे की ऊंचाई 12 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए, जैसा कि नियमों में निर्धारित है।

पूर्व सांसद ने ध्वनि प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 60 डेसिबल की अनुमति के भीतर डीजे बजाए जा सकते हैं, लेकिन अनियंत्रित तेज आवाज से मरीजों को परेशानी होती है। सड़क किनारे खड़े मरीज तेज आवाज से डरकर भागने को मजबूर हो जाते हैं, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।

भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत ने कांवड़ यात्रा में डीजे पर रोक लगाने की मांग की है। इस मुद्दे पर एस.टी. हसन ने कहा कि वे नरेश टिकैत की इस मांग का समर्थन नहीं करते, क्योंकि यह एक धार्मिक मुद्दा है, और सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए मानक तय किए हैं। यदि कोई व्यक्ति इससे अधिक तेज आवाज में कांवड़ ले जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान का जिक्र करते हुए कहा कि रामपुर और सैफई परिवार में सब कुछ ठीक है। तंजीम फातिमा शायद किसी बात से नाराज होकर कुछ कह गई हों, लेकिन स्थिति सामान्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस संदर्भ में नियमों का पालन करना आवश्यक है। एस.टी. हसन का सुझाव कि डीजे की आवाज सीमित होनी चाहिए, यह दर्शाता है कि धार्मिक आस्था और सार्वजनिक शांति दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज कितनी होनी चाहिए?
कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज 60 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए, जैसा कि एस.टी. हसन ने कहा।
कांवड़ पथ का क्या महत्व है?
कांवड़ पथ का निर्माण कांवड़ियों को सुविधा प्रदान करेगा और आम जनता को परेशानी से बचाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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