केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने CM योगी को लिखा पत्र, NCR श्रमिकों की दुर्दशा पर उठाए गंभीर सवाल

Click to start listening
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने CM योगी को लिखा पत्र, NCR श्रमिकों की दुर्दशा पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर NCR के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की बदहाली उजागर की है — 10 साल से न्यूनतम मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं, 12-13 घंटे काम, यूनियन बनाने पर रोक और पुलिस कार्रवाई। यूनियनों ने तत्काल मजदूरी बोर्ड गठन और गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई की माँग की है।

Key Takeaways

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 2 मई 2026 को CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर NCR के औद्योगिक श्रमिकों की दुर्दशा उजागर की। पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी में कोई संशोधन नहीं, जबकि कानून में स्पष्ट प्रावधान हैं। श्रमिकों को बिना ओवरटाइम भुगतान के 12-13 घंटे काम करने पर मजबूर किया जा रहा है। यूनियन गठन की कोशिश करने वाले श्रमिकों पर नौकरी जाने का खतरा, सामूहिक सौदेबाजी पूरी तरह अनुपस्थित। प्रदर्शनकारी श्रमिकों पर पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी और कड़ी धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के आरोप। यूनियनों ने तत्काल न्यूनतम मजदूरी बोर्ड गठन और गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई की माँग की।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने 2 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) सहित प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की बदतर स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। पत्र में न्यूनतम मजदूरी, अत्यधिक काम के घंटे, कार्यस्थल सुरक्षा, यूनियन अधिकार और पुलिस कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की माँग की गई है।

न्यूनतम मजदूरी में दस साल से कोई संशोधन नहीं

पत्र में यूनियनों ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम मजदूरी में कोई संशोधन नहीं हुआ है, जबकि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। यूनियनों के अनुसार, महंगाई के कारण आवश्यक वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे श्रमिकों का जीवन और कठिन हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में श्रम सुधारों पर बहस तेज़ है।

कार्यस्थल पर शोषण और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

ट्रेड यूनियनों ने दावा किया कि कई औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों को बिना ओवरटाइम भुगतान के 12-13 घंटे काम करने पर मजबूर किया जाता है। महिला श्रमिकों सहित श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आम हैं। कार्यस्थलों पर शौचालय, पीने का पानी और विश्राम कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं, और छुट्टियों के प्रावधानों की भी अनदेखी हो रही है।

यूनियन बनाने पर रोक और पुलिसिया कार्रवाई

पत्र में सबसे गंभीर आरोप यह है कि श्रमिकों को यूनियन गठित करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यूनियनों के अनुसार, यूनियन बनाने का प्रयास करने वाले श्रमिकों को नौकरी से निकाले जाने का खतरा रहता है और सामूहिक सौदेबाजी पूरी तरह अनुपस्थित है। यूनियनों ने आरोप लगाया कि जब श्रमिकों ने शिकायतें दर्ज कराईं, तो प्रशासन ने उनके नेताओं को नज़रबंद कर दिया, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा अत्याचार किया गया और कड़ी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। महिला श्रमिकों के अपमान की भी शिकायतें हैं। यूनियनों के अनुसार, कई परिवार अपने गिरफ्तार सदस्यों का पता लगाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं और जमानत याचिकाएँ भी खारिज हो रही हैं।

यूनियनों की प्रमुख माँगें

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि गिरफ्तार श्रमिकों को रिहा किया जाए और उनके परिवारों को राहत दी जाए। यूनियनों का कहना है कि औद्योगिक अशांति का कारण श्रमिक नहीं, बल्कि नियोक्ताओं द्वारा श्रम कानूनों का पालन न करना है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से न्यूनतम मजदूरी समिति या बोर्ड के गठन की माँग की है, जिसमें वैज्ञानिक आधार पर मजदूरी तय की जा सके।

औद्योगिक शांति पर चेतावनी

ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि श्रमिकों की समस्याओं को नज़रअंदाज किया गया तो उनकी बेचैनी और बढ़ेगी, जिससे औद्योगिक शांति प्रभावित हो सकती है। यूनियनों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों और उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ शीघ्र बैठक बुलाने का भी आग्रह किया है। गौरतलब है कि NCR के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम विवादों का इतिहास पुराना है और यह पत्र उस दिशा में एक नई कड़ी है।

Point of View

और यह तथ्य अकेले ही गंभीर जवाबदेही की माँग करता है। NCR के औद्योगिक क्षेत्रों में यूनियन दमन और पुलिसिया कार्रवाई की यह तस्वीर 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' की उस चमकदार कहानी से बिल्कुल अलग है जो सरकार प्रस्तुत करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या CM योगी आदित्यनाथ इस पत्र को महज़ एक और ज्ञापन मानते हैं, या श्रम कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर ठोस कदम उठाते हैं।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने CM योगी को पत्र क्यों लिखा?
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 2 मई 2026 को CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर NCR के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की बदतर स्थिति — न्यूनतम मजदूरी में 10 साल से कोई संशोधन नहीं, यूनियन अधिकारों का दमन और पुलिस कार्रवाई — पर ध्यान दिलाया। यूनियनों ने तत्काल राहत और बैठक बुलाने की माँग की है।
उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी में आखिरी बार कब संशोधन हुआ था?
ट्रेड यूनियनों के पत्र के अनुसार पिछले 10 वर्षों से उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। महंगाई के बीच यह स्थिति श्रमिकों की क्रय शक्ति को लगातार कमज़ोर कर रही है।
NCR के श्रमिकों पर पुलिस कार्रवाई के क्या आरोप हैं?
यूनियनों ने आरोप लगाया है कि शिकायत दर्ज कराने वाले श्रमिकों के नेताओं को नज़रबंद किया गया, प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार हुआ और कड़ी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। महिला श्रमिकों के अपमान और जमानत याचिकाएँ खारिज होने की भी शिकायतें हैं।
ट्रेड यूनियनों ने CM योगी से क्या माँगें रखी हैं?
यूनियनों ने गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई, उनके परिवारों को राहत, तत्काल न्यूनतम मजदूरी बोर्ड के गठन और केंद्रीय ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के साथ शीघ्र बैठक बुलाने की माँग की है। यूनियनों का कहना है कि औद्योगिक अशांति के लिए श्रमिक नहीं, नियोक्ताओं द्वारा कानूनों का उल्लंघन जिम्मेदार है।
यदि श्रमिकों की समस्याएँ नहीं सुलझाई गईं तो क्या होगा?
ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि समस्याओं की अनदेखी से श्रमिकों की बेचैनी बढ़ेगी और औद्योगिक शांति प्रभावित हो सकती है। NCR के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम विवादों का पुराना इतिहास है, और यह स्थिति उत्पादन तथा निवेश माहौल दोनों पर असर डाल सकती है।
Nation Press