क्या केरल विधानसभा चुनाव से पहले माकपा में टूटने के संकेत मिल रहे हैं?

Click to start listening
क्या केरल विधानसभा चुनाव से पहले माकपा में टूटने के संकेत मिल रहे हैं?

सारांश

क्या माकपा की टूट का मतलब है कि केरल में राजनीति में बड़ा बदलाव आ रहा है? जानिए इस अंदरूनी संकट के पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम।

Key Takeaways

  • माकपा के कई वरिष्ठ नेता भाजपा और कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं।
  • रेजी लुकोस ने भाजपा की विकासपरक नीतियों को सराहा।
  • आयशा पोट्टी का पार्टी छोड़ना एक गंभीर संकेत है।
  • राजनीतिक धारा में परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं।
  • माकपा के महासचिव ने घटनाक्रम को दुखद बताया।

तिरुवनंतपुरम, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) एक गंभीर अंदरूनी संकट का सामना कर रही है। पार्टी के कई प्रमुख नेता और पूर्व विधायक पहले से अधिक संख्या में पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं, जिससे वाम मोर्चे की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

एक दशक से अधिक समय तक टीवी बहसों में माकपा का महत्वपूर्ण चेहरा रहे रेजी लुकोस ने हाल ही में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने वाम दल की “जंग खा चुकी नीतियों” और “सांप्रदायिक रुख” से निराशा व्यक्त करते हुए भाजपा की विकासपरक सोच को अपने निर्णय का कारण बताया।

लुकोस ने कहा, “केरल में भाजपा द्वारा प्रस्तावित विकासात्मक नीतियां और कार्यक्रम मुझे बहुत आकर्षित करते हैं।” उन्होंने भाजपा के दृष्टिकोण और प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर की भी प्रशंसा की।

उन्होंने राज्य सरकार पर छात्रों और युवाओं के बड़े पैमाने पर विदेश पलायन को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। लुकोस के अनुसार, शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण यह पलायन हो रहा है और इसे रोकने के लिए न तो वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और न ही कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने ठोस कदम उठाए हैं।

पार्टी के अंदरूनी संकट को और बढ़ाते हुए, तीन बार की विधायक आयशा पोट्टी ने मंगलवार को कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। उन्होंने माकपा नेतृत्व पर लगातार उपेक्षा का आरोप लगाया। पोट्टी ने 2006 के विधानसभा चुनाव में कोट्टाराक्कारा सीट से दिग्गज नेता आर. बालकृष्ण पिल्लै को हराकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई थी। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों में यूडीएफ उन्हें उम्मीदवार बना सकता है।

पार्टी छोड़ने पर हो रही आलोचनाओं से बेपरवाह आयशा पोट्टी ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम में एक कांग्रेस कार्यक्रम में कहा था कि माकपा अब पहले जैसी पार्टी नहीं रही।

पूर्व मंत्री जे. मर्सीकुट्टी अम्मा ने पोट्टी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “वर्गद्रोही” करार दिया और कहा कि वह “सत्ता की लालसा” में पार्टी छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा, “पार्टी ने उन्हें तीन बार विधायक बनाकर हर संभव लाभ दिया। उनका जाना विश्वासघात है।”

माकपा के महासचिव एम.ए. बेबी ने इन घटनाक्रमों को “दुखद” बताया, हालांकि उन्होंने दावा किया कि इससे पार्टी को चुनावी नुकसान नहीं होगा।

इसी बीच, इडुक्की जिले के देविकुलम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके एस. राजेंद्रन ने भी जल्द भाजपा में शामिल होने की पुष्टि की है। राजेंद्रन 2006, 2011 और 2016 में देविकुलम से विधायक रहे थे। उन्हें 2021 में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था, हालांकि उस चुनाव में माकपा के उम्मीदवार ए. राजा जीतने में सफल रहे थे।

इन घटनाओं ने केरल की पुरानी राजनीतिक धारणा को चुनौती दी है, जिसमें प्रतिबद्ध कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं का वैचारिक विरोधी दलों में जाना बेहद दुर्लभ माना जाता था।

हालांकि माकपा ने रेजी लुकोस को पूर्णकालिक सदस्य के बजाय केवल समर्थक बताकर उनके जाने के प्रभाव को कम करने की कोशिश की है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर वर्षों तक पार्टी का बचाव करने के कारण उनका जाना राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

Point of View

बल्कि पूरे वाम मोर्चे के लिए चुनौती है। यह समय है जब सभी राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करना चाहिए।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या माकपा में टूट का असर अगले चुनावों पर पड़ेगा?
हां, माकपा में हो रही टूट का असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है, क्योंकि यह पार्टी की चुनावी ताकत को कमजोर कर सकता है।
रेजी लुकोस ने भाजपा क्यों जॉइन किया?
रेजी लुकोस ने भाजपा जॉइन करने का कारण पार्टी की नीतियों से निराशा और विकासपरक दृष्टिकोन को बताया।
आयशा पोट्टी का माकपा छोड़ना क्यों महत्वपूर्ण है?
आयशा पोट्टी का माकपा छोड़ना इस बात का संकेत है कि पार्टी के अंदर एक बड़ा असंतोष मौजूद है, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
Nation Press