क्या केरल भाजपा ने सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में सीपीआई (एम)-कांग्रेस गठजोड़ पर आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने आरोप लगाया है कि सीपीआई (एम) और कांग्रेस का गठजोड़ सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में है।
- राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
- तांत्रिक की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए गए हैं।
- राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाया गया है।
- मामला केरल की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है।
तिरुवनंतपुरम, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को यह आरोप लगाया कि सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले के पीछे सीपीआई (एम) और कांग्रेस का 'निजी स्वार्थों वाला गठजोड़' था।
उन्होंने तांत्रिक (पुजारी) कंतारार राजीवर की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य जिम्मेदार लोगों से ध्यान भटकाना था। उन्होंने इस मामले में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।
चंद्रशेखर ने पूछा कि इस मामले में किसी मंत्री को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। यदि तांत्रिक को गिरफ्तार किया जा सकता है, तो मंत्री को क्यों नहीं? कथित सोने की चोरी में कई प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि यह घटना बिना राजनीतिक संरक्षण के नहीं हो सकती थी, और उन्होंने सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ और विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ दोनों पर अपराध के पीछे के लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
चंद्रशेखर ने घोषणा की कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए 14 जनवरी को मकर विलक्कू दिवस पर घरों और मोहल्लों में 'अय्यप्पा ज्योति' जलाकर दोनों मोर्चों के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप और कुप्रबंधन के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन की शुरुआत होगी।
उन्होंने आगे कहा कि घरों और मोहल्लों में दीपक जलाना एलडीएफ और यूडीएफ के खिलाफ सार्वजनिक प्रतिरोध का प्रतीक होगा।
इसी बीच के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली रहस्यमय थी। सुरेंद्रन ने कहा कि तांत्रिक को हिरासत में रखने का कोई अधिकार नहीं था और मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी देवस्वोम बोर्ड की थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी की पूरी जिम्मेदारी बोर्ड और उसकी देखरेख करने वाली सरकार की है। उन्होंने कहा कि यदि रीति-रिवाजों का उल्लंघन हुआ है तो पहली गिरफ्तारी मुख्यमंत्री की होनी चाहिए थी।
सुरेंद्रन ने यह भी बताया कि रिमांड रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि तांत्रिक को इस घटना से कोई वित्तीय लाभ हुआ है, जिससे गिरफ्तारी के पीछे के तर्क पर संदेह पैदा होता है।