खड़गे का मोदी सरकार पर हमला: अरुणाचल झड़पें, ₹9.3 लाख करोड़ का व्यापार घाटा — 'चीन को क्लीन चिट देना बंद करें'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 23 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर की गई पोस्ट में केंद्र सरकार की चीन नीति पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा, "चीन को दी गई क्लीन चिटें अब बहुत हो गईं। प्रधानमंत्री मोदी को भारत के सामने सच्चाई बतानी होगी।" उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी झड़पों, 155 प्रतिशत बढ़े व्यापार घाटे और राजनयिक वार्ताओं के ठोस नतीजों के अभाव को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और कूटनीतिक जवाबदेही — तीन बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा।
अरुणाचल में सुरक्षा की स्थिति
खड़गे ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक द्वारा अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ चल रही झड़पों की सार्वजनिक पुष्टि का हवाला देते हुए गहरी चिंता जताई। उन्होंने डोकलाम और गलवान के पिछले टकरावों की याद दिलाते हुए पूछा कि क्या कोई और गंभीर संघर्ष पनप रहा है।
उन्होंने बताया कि अगस्त में तकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरें आई थीं, और वाचा दमाई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 47 दिन बाद भी — जो मात्र 180 किलोमीटर दूर है — टकराव बंद नहीं हुए। खड़गे ने सवाल उठाया कि क्या भारत की गश्ती पहुंच से समझौता किया गया है, और स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।
आर्थिक सुरक्षा: ₹9.3 लाख करोड़ का घाटा
खड़गे ने आँकड़ों के साथ आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2020 21 में गलवान संघर्ष — जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे — के बाद से भारत में चीनी आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी अवधि में द्विपक्षीय व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर $112.16 अरब डॉलर (लगभग ₹9.3 लाख करोड़) तक पहुँच गया है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वयं स्वीकार किया है कि चीन भारतीय निर्यात में बाधा डालना जारी रखे हुए है। इसके बावजूद, खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार चीनी निवेश पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे रही है और पात्र चीनी संबंधित उद्यमों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) का लाभ देने पर विचार कर रही है। उन्होंने व्यंग्यात्मक सवाल किया कि क्या 'मेक इन इंडिया' का नारा असल में "चीन से आयात" में बदल गया है।
कूटनीतिक जवाबदेही पर सवाल
खड़गे ने भारत चीन के बीच व्यापक उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और वार्ताएँ हो चुकी हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी में विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ताएँ, परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 36 बैठकें, और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) व ब्रिक्स (BRICS) के लगातार शिखर सम्मेलन हो चुके हैं।
इतनी लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया के ठोस परिणाम सामने न आने पर खड़गे ने पूछा कि क्या सीमा पर भारत के मई 2020 से पहले के गश्ती अधिकार पूरी तरह बहाल कर दिए गए हैं। उन्होंने सशस्त्र बलों पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए "हगप्लोमेसी" नहीं, वास्तविक जवाबदेही ज़रूरी है।
विपक्ष की मुख्य माँग
खड़गे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे विपक्ष पर हमले बंद करें और इसके बजाय संसद तथा भारत की जनता के समक्ष सभी तथ्य रखें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश को अंधेरे में रखना राष्ट्रीय हित में नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत चीन संबंध सामान्यीकरण के लिए सक्रिय प्रयास हो रहे हैं, फिर भी सीमा पर अनिश्चितता बनी हुई है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विपक्ष ने चीन नीति पर सरकार से सार्वजनिक जवाबदेही माँगी हो — गलवान के बाद से यह माँग नियमित रूप से उठती रही है।