खड़गे का केंद्र पर प्रहार: अरुणाचल झड़पें, ₹9.35 लाख करोड़ का व्यापार घाटा — 'चीन को क्लीन चिट बंद करें'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 23 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद, बढ़ते व्यापार घाटे और कूटनीतिक जवाबदेही पर संसद और देश के सामने सच्चाई रखें। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए अपने बयान में खड़गे ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही से जुड़े तीन तीखे सवाल उठाए।
अरुणाचल में झड़पें — राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
खड़गे ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक ने स्वयं अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी झड़पों की पुष्टि की है। उन्होंने डोकलाम और गलवान के पिछले टकरावों का स्मरण कराते हुए पूछा कि क्या कोई और गंभीर संघर्ष पनप रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अगस्त में तकसिंग के निकट चीनी घुसपैठ की खबरों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 47 दिन बाद भी टकराव जारी हैं — और यह स्थान मात्र 180 किलोमीटर दूर है। खड़गे ने सीधे पूछा कि क्या भारत की गश्ती पहुँच से समझौता किया गया है और यह भी रेखांकित किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।
व्यापार घाटा — आर्थिक सुरक्षा पर चेतावनी
आर्थिक मोर्चे पर खड़गे ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में गलवान संघर्ष के बाद से भारत में चीनी आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर $112.16 अरब (लगभग ₹9.35 लाख करोड़) के स्तर पर पहुँच गया है।
उल्लेखनीय है कि गलवान संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। खड़गे ने यह भी बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वयं स्वीकार किया है कि चीन भारतीय निर्यात में बाधाएँ डालना जारी रखे हुए है। इसके बावजूद, खड़गे के अनुसार, सरकार चीनी निवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दे रही है और पात्र चीनी-संबंधित उद्यमों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) का लाभ देने पर भी विचार कर रही है।
खड़गे ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या 'मेक इन इंडिया' का नारा वास्तव में 'चीन से आयात' में तब्दील हो गया है।
कूटनीतिक जवाबदेही — बैठकें हुईं, नतीजे क्या?
खड़गे ने चीन के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं का ब्यौरा देते हुए सवाल उठाया कि इतनी बैठकों के बावजूद ज़मीन पर बदलाव क्यों नहीं आया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और बातचीत हो चुकी हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की सहभागिता में विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ताएँ हुई हैं, परामर्श और समन्वय के लिए 36 बैठकें हो चुकी हैं, और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) तथा ब्रिक्स (BRICS) के लगातार शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने जानना चाहा कि इन वार्ताओं के ठोस परिणाम क्या रहे और क्या मई 2020 से पहले की गश्ती स्थिति पूरी तरह बहाल हुई है। उन्होंने देश के सशस्त्र बलों पर पूर्ण विश्वास जताते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'हगप्लोमेसी' नहीं, वास्तविक जवाबदेही चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया
खड़गे के बयान के समय तक केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन संबंधों को लेकर संसद में पहले भी कई बार गतिरोध उत्पन्न हो चुका है।
आगे की राह
खड़गे ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट आग्रह किया कि वे विपक्ष पर निशाना साधने के बजाय संसद और देश की जनता के सामने तथ्य रखें। भारत-चीन सीमा विवाद और द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन का मुद्दा आने वाले संसद सत्र में प्रमुख चर्चा का केंद्र बनने की संभावना है।