23 अक्टूबर 2026
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खड़गे का केंद्र पर प्रहार: अरुणाचल झड़पें, ₹9.35 लाख करोड़ का व्यापार घाटा — 'चीन को क्लीन चिट बंद करें'

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खड़गे का केंद्र पर प्रहार: अरुणाचल झड़पें, ₹9.35 लाख करोड़ का व्यापार घाटा — 'चीन को क्लीन चिट बंद करें'

सारांश

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने अरुणाचल में PLA झड़पों की ITBP प्रमुख द्वारा पुष्टि, गलवान के बाद 102% बढ़े चीनी आयात और $112.16 अरब के व्यापार घाटे को आधार बनाकर मोदी सरकार से सवाल किया — 23 शिखर बैठकों के बावजूद सीमा पर स्थिति क्यों नहीं सुधरी?

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 23 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार की चीन नीति पर तीन तीखे सवाल उठाए।
ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ जारी झड़पों की स्वयं पुष्टि की है; तकसिंग के पास घुसपैठ की खबरें भी सामने आई हैं।
वित्त वर्ष 2020-21 से चीनी आयात में 102% वृद्धि; द्विपक्षीय व्यापार घाटा 155% बढ़कर $112.16 अरब पर पहुँचा।
खड़गे ने पूछा — मोदी-शी की 23 बैठकों और NSA डोभाल की 25 दौर की वार्ताओं के बावजूद मई 2020 से पहले के गश्ती अधिकार बहाल क्यों नहीं हुए।
खड़गे के अनुसार, सरकार चीनी निवेश प्रतिबंधों में ढील दे रही है और PLI लाभ चीनी-संबंधित उद्यमों को देने पर विचार कर रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 23 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद, बढ़ते व्यापार घाटे और कूटनीतिक जवाबदेही पर संसद और देश के सामने सच्चाई रखें। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए अपने बयान में खड़गे ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही से जुड़े तीन तीखे सवाल उठाए।

अरुणाचल में झड़पें — राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

खड़गे ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक ने स्वयं अरुणाचल प्रदेश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी झड़पों की पुष्टि की है। उन्होंने डोकलाम और गलवान के पिछले टकरावों का स्मरण कराते हुए पूछा कि क्या कोई और गंभीर संघर्ष पनप रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अगस्त में तकसिंग के निकट चीनी घुसपैठ की खबरों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 47 दिन बाद भी टकराव जारी हैं — और यह स्थान मात्र 180 किलोमीटर दूर है। खड़गे ने सीधे पूछा कि क्या भारत की गश्ती पहुँच से समझौता किया गया है और यह भी रेखांकित किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।

व्यापार घाटा — आर्थिक सुरक्षा पर चेतावनी

आर्थिक मोर्चे पर खड़गे ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में गलवान संघर्ष के बाद से भारत में चीनी आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर $112.16 अरब (लगभग ₹9.35 लाख करोड़) के स्तर पर पहुँच गया है।

उल्लेखनीय है कि गलवान संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। खड़गे ने यह भी बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वयं स्वीकार किया है कि चीन भारतीय निर्यात में बाधाएँ डालना जारी रखे हुए है। इसके बावजूद, खड़गे के अनुसार, सरकार चीनी निवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दे रही है और पात्र चीनी-संबंधित उद्यमों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) का लाभ देने पर भी विचार कर रही है।

खड़गे ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या 'मेक इन इंडिया' का नारा वास्तव में 'चीन से आयात' में तब्दील हो गया है।

कूटनीतिक जवाबदेही — बैठकें हुईं, नतीजे क्या?

खड़गे ने चीन के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं का ब्यौरा देते हुए सवाल उठाया कि इतनी बैठकों के बावजूद ज़मीन पर बदलाव क्यों नहीं आया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें और बातचीत हो चुकी हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की सहभागिता में विशेष प्रतिनिधियों के 25 दौर की वार्ताएँ हुई हैं, परामर्श और समन्वय के लिए 36 बैठकें हो चुकी हैं, और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) तथा ब्रिक्स (BRICS) के लगातार शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने जानना चाहा कि इन वार्ताओं के ठोस परिणाम क्या रहे और क्या मई 2020 से पहले की गश्ती स्थिति पूरी तरह बहाल हुई है। उन्होंने देश के सशस्त्र बलों पर पूर्ण विश्वास जताते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 'हगप्लोमेसी' नहीं, वास्तविक जवाबदेही चाहिए।

सरकार की प्रतिक्रिया

खड़गे के बयान के समय तक केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन संबंधों को लेकर संसद में पहले भी कई बार गतिरोध उत्पन्न हो चुका है।

आगे की राह

खड़गे ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट आग्रह किया कि वे विपक्ष पर निशाना साधने के बजाय संसद और देश की जनता के सामने तथ्य रखें। भारत-चीन सीमा विवाद और द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन का मुद्दा आने वाले संसद सत्र में प्रमुख चर्चा का केंद्र बनने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आँकड़े उसकी उलटी कहानी कहते हैं। 23 शिखर बैठकों और 36 तंत्र-स्तरीय वार्ताओं के बावजूद यदि सीमा पर गश्ती अधिकार मई 2020 की स्थिति में नहीं लौटे, तो यह कूटनीतिक सक्रियता नहीं बल्कि प्रक्रिया का भ्रम है। मुख्यधारा की कवरेज जो बात अक्सर चूकती है वह यह है कि व्यापार और सुरक्षा के इस दोहरे विरोधाभास का संसदीय उत्तर अभी तक किसी भी सरकार ने सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खड़गे ने अरुणाचल प्रदेश में PLA झड़पों पर क्या कहा?
खड़गे ने बताया कि ITBP के महानिदेशक ने स्वयं अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ जारी झड़पों की पुष्टि की है। उन्होंने अगस्त में तकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबरों और वाचा-दमाई में कोर कमांडर वार्ता के 47 दिन बाद भी टकराव जारी रहने पर चिंता जताई।
भारत-चीन व्यापार घाटा अभी कितना है और यह कितना बढ़ा है?
खड़गे द्वारा उद्धृत आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में गलवान संघर्ष के बाद से भारत में चीनी आयात 102% बढ़ा है और द्विपक्षीय व्यापार घाटा 155% बढ़कर $112.16 अरब हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी माना है कि चीन भारतीय निर्यात में बाधाएँ डाल रहा है।
खड़गे ने मोदी-शी बैठकों पर क्या सवाल उठाया?
खड़गे ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 बैठकें हो चुकी हैं, NSA अजीत डोभाल की भागीदारी में 25 दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ताएँ और 36 तंत्र-स्तरीय बैठकें भी हुई हैं। इसके बावजूद उन्होंने पूछा कि मई 2020 से पहले के गश्ती अधिकार पूरी तरह बहाल हुए हैं या नहीं।
खड़गे ने PLI और चीनी निवेश पर क्या आरोप लगाया?
खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार चीनी निवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दे रही है और पात्र चीनी-संबंधित उद्यमों को PLI का लाभ देने पर विचार कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 'मेक इन इंडिया' वास्तव में 'चीन से आयात' में बदल गया है।
खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से क्या माँग की?
खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से विपक्ष पर हमले बंद करके संसद और देश की जनता के सामने चीन से जुड़े सभी तथ्य रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीतिक दिखावे की नहीं, वास्तविक जवाबदेही की ज़रूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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