केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘उन्नत कृषि मेला’ को शिक्षा का केंद्र बताया, कृषि तकनीक पर जोर दिया
सारांश
Key Takeaways
- कृषि मेला किसानों के लिए शिक्षा का केंद्र है।
- 300 से अधिक स्टॉल में नई तकनीकों का प्रदर्शन।
- किसान वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सीधे ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
- किसान एकीकृत खेती अपनाकर अच्छी आय कमा सकते हैं।
- सरकार किसानों की आजीविका सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।
रायसेन, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि रायसेन में हो रहा कृषि मेला खेती में व्यावहारिक परिवर्तन लाने पर केंद्रित है, जिसमें किसान सीधे विज्ञान, तकनीक और बाजार से जुड़ रहे हैं।
‘उन्नत कृषि मेला’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन एक “हैंड्स-ऑन लर्निंग प्लेटफॉर्म” के रूप में विकसित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक बैठक या भाषण का मंच नहीं है, बल्कि ऐसा मेला है जिसे एक स्कूल की तरह बनाया गया है, जहां किसान वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों से सीधे ज्ञान प्राप्त करेंगे।
11 से 13 अप्रैल तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशभर से हजारों किसान, वैज्ञानिक, एग्री-स्टार्टअप्स और विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
मेले में 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें कृषि, बागवानी, सिंचाई, मशीनीकरण, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित नई तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में चौहान ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश के 4,000 से अधिक किसानों ने मेले के दौरान नई कृषि तकनीकों के लाइव डेमोंस्ट्रेशन के लिए पंजीकरण कराया है।
उन्होंने बताया कि लगभग 20 विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर विविधीकरण अपनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक या दो एकड़ जमीन पर भी किसान एकीकृत खेती अपनाकर सालाना 2 लाख रुपये से अधिक कमा सकते हैं, जिसमें फसलों के साथ बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और पोल्ट्री शामिल हैं।
किसानों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए किसान भगवान के समान हैं और उनकी सेवा करना पूजा के सामान है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसानों की आजीविका सुधारना सरकार की प्राथमिकता बताया।
चौहान ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राज्य-विशिष्ट कृषि रोडमैप तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि हर राज्य की मिट्टी और परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए हर राज्य के लिए अलग कृषि मॉडल विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जैसे जिलों के लिए पहले ही रोडमैप तैयार किया जा चुका है, जिससे किसानों को उपयुक्त फसल और आधुनिक तरीकों की जानकारी मिल सके।
उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकार, मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में, इसे जमीन पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और वास्तविक बदलाव लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
बाजार समर्थन को बेहतर बनाने के लिए मंत्री ने घोषणा की कि राज्य में 55 दाल मिलें स्थापित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार मसूर, उड़द और तुअर की पूरी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदेगी।
तकनीक और वैल्यू एडिशन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि ‘मृदा/ई-फार्म’ जैसे उपकरणों की मदद से किसान मिट्टी की सेहत का आकलन कर लागत कम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण से जुड़कर किसान अपनी आय में और वृद्धि कर सकते हैं।