14 अक्टूबर 2026
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कोलकाता में आईसीसी के निवेश सम्मेलन में थाईलैंड-ऑस्ट्रेलिया के राजनयिकों ने पश्चिम बंगाल में निवेश पर जताया भरोसा

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कोलकाता में आईसीसी के निवेश सम्मेलन में थाईलैंड-ऑस्ट्रेलिया के राजनयिकों ने पश्चिम बंगाल में निवेश पर जताया भरोसा

सारांश

कोलकाता में आईसीसी के निवेश सम्मेलन में थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया के राजनयिकों ने पश्चिम बंगाल में साझेदारी बढ़ाने का संकेत दिया। मंत्रियों ने इसे बंगाल को वैश्विक मानचित्र पर वापस लाने की दिशा में एक जरूरी, हालाँकि धीमी, शुरुआत बताया।

मुख्य बातें

13 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में आईसीसी का ग्लोबल पार्टनरशिप एवं निवेश सम्मेलन आयोजित हुआ।
थाईलैंड की उप महावाणिज्य दूत बेनजापा टबथोंग ने पश्चिम बंगाल में अधिक थाई निवेशकों को आकर्षित करने की उम्मीद जताई।
ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत बर्नार्ड लिंच ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को 'बेहद गतिशील' बताते हुए पश्चिम बंगाल के साथ व्यापारिक विस्तार की संभावना व्यक्त की।
मंत्री तपस रॉय ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक एवं आर्थिक विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह सम्मेलन तात्कालिक निवेश अपील नहीं, बल्कि दीर्घकालिक छवि-निर्माण की पहल है।

कोलकाता में 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के ग्लोबल पार्टनरशिप एवं निवेश सम्मेलन में कई देशों के राजनयिकों ने हिस्सा लिया। थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूतों ने पश्चिम बंगाल में निवेश की संभावनाओं पर विश्वास जताया और राज्य के साथ व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। राज्य सरकार के मंत्रियों ने इस आयोजन को बंगाल को वैश्विक निवेश मानचित्र पर पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

मुख्य घटनाक्रम

यह सम्मेलन आईसीसी द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें दुर्गा पूजा के बाद के आर्थिक उत्साह के बीच वैश्विक साझेदारियाँ बनाने पर ज़ोर दिया गया। कार्यक्रम में थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के राजदूत, महावाणिज्य दूत और कांसुलेट प्रतिनिधि उपस्थित रहे। राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए।

मंत्रियों की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल के मंत्री तपस रॉय ने कहा, 'बहुत अच्छा लगा। मैं बहुत खुश और उत्साहित हूँ। इतने सारे देशों से हमारे एंबेसडर, कांसुल और कांसुलेट आए हैं और वे भी वास्तव में पश्चिम बंगाल के समग्र विकास, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास के लिए काफी रुचि दिखा रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि यह आयोजन पश्चिम बंगाल में हो रहे विकास के बारे में राजनयिक समुदाय को संवेदनशील बनाने का एक दुर्लभ अवसर था। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मुझे नहीं लगता कि यह निवेश के लिए कोई सीधी अपील है, बल्कि यह लोगों को पश्चिम बंगाल से जान-पहचान कराने और इसे दुनिया के मैप पर वापस लाने के लिए है।' उन्होंने माना कि यह एक धीमी प्रक्रिया है, लेकिन एक अनिवार्य पहला कदम है।

विदेशी राजनयिकों का नज़रिया

थाईलैंड की उप महावाणिज्य दूत बेनजापा टबथोंग ने कहा कि थाईलैंड में भारत से निवेश की अपार संभावनाएँ हैं और उन्हें उम्मीद है कि और अधिक थाई निवेशक पश्चिम बंगाल की ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा, 'हमें पारंपरिक खरीद-फरोख्त से आगे बढ़कर सह-निर्माण की जरूरत है — हम साथ मिलकर बाजार तलाशेंगे और साथ मिलकर लाभ उठाएंगे।' गौरतलब है कि थाईलैंड के वाणिज्य मंत्रालय ने पहले से ही इस दिशा में पहल की है।

कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत बर्नार्ड लिंच ने कहा, 'भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध बेहद गतिशील हैं। पश्चिम बंगाल के साथ हमारे पहले से ही अच्छी तरह से स्थापित व्यावसायिक संबंध हैं और मैं इसमें विस्तार की अपार संभावनाएं देख रहा हूँ।' उन्होंने व्यावसायिक संबंधों में वृद्धि का समर्थन करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

आम जनता और उद्योग पर असर

यह आयोजन ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। राज्य सरकार का दावा है कि वह नई पीढ़ी के लिए आर्थिक एवं औद्योगिक विकास की जमीन तैयार कर रही है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे सम्मेलनों की असली परीक्षा ठोस निवेश घोषणाओं और रोजगार सृजन के रूप में होती है।

क्या होगा आगे

मंत्री स्वपन दासगुप्ता के अनुसार, यह एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है और राज्य वैश्विक स्तर पर अपनी छवि को और मजबूत करने की दिशा में काम करता रहेगा। आने वाले समय में इसी तरह के और सम्मेलन आयोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें अधिक देशों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की कोशिश की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार मंत्री स्वपन दासगुप्ता की यह स्वीकारोक्ति उल्लेखनीय है कि यह निवेश के लिए 'सीधी अपील' नहीं, बल्कि जान-पहचान का पहला कदम है — यानी ठोस प्रतिबद्धताएँ अभी दूर हैं। राजनयिकों की उपस्थिति और सकारात्मक बयान स्वागतयोग्य हैं, परन्तु राज्य में वास्तविक औद्योगिक निवेश की राह में दशकों पुरानी नीतिगत चुनौतियाँ बनी हुई हैं। असली कसौटी यह होगी कि इस 'धीमी प्रक्रिया' के परिणाम कितने वर्षों में मापनीय रोजगार और पूँजी-प्रवाह के रूप में सामने आते हैं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में आईसीसी का ग्लोबल पार्टनरशिप सम्मेलन क्या था?
यह 13 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में आयोजित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) का व्यापार सम्मेलन था, जिसमें वैश्विक साझेदारी और पश्चिम बंगाल में निवेश को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के राजनयिक और राज्य के वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए।
थाईलैंड ने पश्चिम बंगाल में निवेश को लेकर क्या कहा?
थाईलैंड की उप महावाणिज्य दूत बेनजापा टबथोंग ने कहा कि पश्चिम बंगाल में थाई निवेश की संभावनाएँ हैं और वे अधिक थाई निवेशकों को राज्य की ओर आकर्षित करने की उम्मीद रखती हैं। उन्होंने पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर 'सह-निर्माण' पर जोर दिया।
ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत ने पश्चिम बंगाल के बारे में क्या कहा?
कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के महावाणिज्य दूत बर्नार्ड लिंच ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध बेहद गतिशील हैं और पश्चिम बंगाल के साथ पहले से स्थापित व्यावसायिक संबंधों में और विस्तार की अपार संभावनाएँ हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस सम्मेलन को किस नजरिए से देखा?
मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन निवेश की सीधी अपील नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दीर्घकालिक प्रक्रिया का पहला कदम है। मंत्री तपस रॉय ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक एवं आर्थिक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस सम्मेलन का पश्चिम बंगाल के विकास पर क्या असर हो सकता है?
राज्य सरकार का मानना है कि यह आयोजन बंगाल की वैश्विक छवि सुधारने और विदेशी निवेशकों के साथ संबंध बनाने की दिशा में अहम है। हालाँकि मंत्रियों ने खुद माना है कि यह एक धीमी प्रक्रिया है और इसके परिणाम आने में समय लगेगा।
राष्ट्र प्रेस
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