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क्या कोलकाता में ईडी रेड के पीछे भाजपा का एजेंसियों का गलत इस्तेमाल है?

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क्या कोलकाता में ईडी रेड के पीछे भाजपा का एजेंसियों का गलत इस्तेमाल है?

सारांश

तृणमूल कांग्रेस के नेता माजिद मेमन ने भाजपा सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्यपाल की नियुक्तियों से संवैधानिक ढांचे को खतरा है। क्या यह सब भारतीय लोकतंत्र के लिए सही है?

मुख्य बातें

केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
राज्यपाल की नियुक्तियां संविधान के मानदंडों के अनुरूप होनी चाहिए।
लोकतंत्र के लिए स्वतंत्रता आवश्यक है।

मुंबई, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस के नेता माजिद मेमन ने कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई कार्रवाई के बाद भाजपा सरकार पर एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आज केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र नहीं रह गई हैं और इन संस्थाओं के प्रमुखों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में माजिद मेमन ने कहा, "चुनावों के दौरान केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल बार-बार देखा गया है, जिसमें चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी संस्थाएं अक्सर सरकार के पक्ष में झुकी हुई नजर आती हैं। इन संस्थाओं को संविधान के तहत पूरी तरह से स्वतंत्र रहने का अधिकार दिया गया है। लेकिन वे स्वतंत्र नहीं हैं और इन संस्थाओं के प्रमुखों को इस पर गंभीरता से चिंतन करना चाहिए।"

टीएमसी नेता ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को 'भाजपा का मोहरा' बताते हुए कहा, "मैं पूरे सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि राज्यपाल का पद बहुत गरिमापूर्ण और सम्मानजनक है। हालांकि, दुर्भाग्य से जिस तरह से भाजपा सरकार ने राज्यपालों की नियुक्ति की है, उससे स्पष्ट होता है कि अधिकांश आरएसएस के सदस्य हैं और भाजपा से जुड़े हुए हैं। यह संवैधानिक ढांचे को कमजोर करता है, और किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष में काम करने वाला राज्यपाल लोकतंत्र के हित में नहीं है।"

उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। टीएमसी नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु तक भाजपा कमजोर हो रही है। इसलिए वह ऐसी मुहिम चला रही है, जिसमें भाजपा को वोट न करने वाले लोगों के नामों को खारिज किया जाए। यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।

इसी बीच, माजिद मेमन ने 'जमीन के बदले नौकरी' मामले में आरोप तय होने पर लालू प्रसाद यादव का बचाव करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, "लालू प्रसाद के खिलाफ सालों से अदालत में कार्रवाई चल रही है। जब भी सरकार को लगता है कि लालू प्रसाद खतरा बन सकते हैं या उनकी राजद फिर से मजबूत हो सकती है, तो उन्हें दबाने के लिए अदालत में केस शुरू कर दिए जाते हैं।"

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अवैध ढांचे को गिराने के फैसले का समर्थन करने पर माजिद मेमन ने कहा, "यह सलमान खुर्शीद का निजी विचार है। कोई भी अपनी राय दे सकता है और उन्होंने अपना नजरिया प्रस्तुत किया है। कांग्रेस इस बयान का समर्थन करती है या नहीं, यह देखना बाकी है।"

उन्होंने कहा कि कानून के तहत की गई कोई भी कार्रवाई हमेशा स्वागत योग्य होती है, लेकिन यदि किसी कार्रवाई से अशांति, झड़पें होती हैं या कानूनी प्रणाली कमजोर होती है, तो उसे रोका जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक बयानबाजी में सच्चाई का पता लगाना कठिन है। केंद्रीय एजेंसियों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता का सवाल लोकतंत्र की नींव है, इसे सभी राजनीतिक दलों को गंभीरता से लेना चाहिए।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कोलकाता में ईडी रेड का राजनीतिक मतलब है?
हां, कई नेताओं का मानना है कि यह भाजपा द्वारा राजनीतिक विरोधियों को दबाने की एक रणनीति है।
माजिद मेमन ने किस मुद्दे पर सवाल उठाए?
उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और राज्यपाल की नियुक्तियों पर प्रश्न उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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