कोटद्वार को ₹675 करोड़ के 400-केवी सब-स्टेशन की सौगात, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण ने 19 अक्टूबर 2026 को कोटद्वार के लिए एक बड़ी बिजली परियोजना का ऐलान किया — हल्दूखाता तल्ला में ₹675 करोड़ की लागत से 400-केवी सब-स्टेशन स्थापित किया जाएगा। यह राशि एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा स्वीकृत है और इस परियोजना के पूरा होने पर कोटद्वार सहित समूचे पौड़ी गढ़वाल में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
परियोजना का विवरण
खंडूरी भूषण के अनुसार, वन एवं बिजली विभाग ने हल्दूखाता तल्ला में संयुक्त सर्वेक्षण कर भूमि चिह्नित की है और उसकी क्षमता 400 केवी आँकी गई है। इस परियोजना का अनुमानित व्यय ₹675 करोड़ है, जिसे ADB ने स्वीकृत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सब-स्टेशन से कोटद्वार के औद्योगिक क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मिलेगी और सतपुली से होने वाली मौजूदा आपूर्ति को भी इसी केंद्र के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
गौरतलब है कि अभी उत्तराखंड में केवल तीन 400-केवी सब-स्टेशन हैं। यह चौथा ऐसा सब-स्टेशन होगा, जो पहाड़ी राज्य की बिजली आपूर्ति की रीढ़ को और मज़बूत करेगा।
औद्योगिक क्षेत्र पर असर
कोटद्वार उत्तराखंड का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। अभी तक बिजली आपूर्ति के लिए यह शहर बाहरी लाइनों पर निर्भर रहा है, जिससे उद्योगों को अनियमित आपूर्ति की समस्या झेलनी पड़ती है। नए सब-स्टेशन से कोटद्वार औद्योगिक क्षेत्र को स्थिर और पर्याप्त बिजली मिलने की उम्मीद है, जो निवेश और रोज़गार के नए अवसर खोल सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दे रही है।
विधानसभा अध्यक्ष का बयान
खंडूरी भूषण ने कहा, 'खासकर अगर मैं सिर्फ कोटद्वार की बात करूं तो हमारे औद्योगिक क्षेत्र को आराम से 24 घंटे बिजली मिलेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि 'पूरे गढ़वाल, पूरे पौड़ी गढ़वाल के लिए यह सब-स्टेशन एक अच्छी पहल होने जा रहा है।' उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस बड़े प्रोजेक्ट को कोटद्वार लाने का निर्णय जनता के हित में है।
पौड़ी गढ़वाल पर व्यापक प्रभाव
पौड़ी गढ़वाल एक पर्वतीय जिला है जहाँ बिजली की पहुँच और स्थिरता हमेशा चुनौती रही है। 400-केवी क्षमता का यह सब-स्टेशन जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में भी आपूर्ति सुधारने में सहायक होगा। आलोचकों का कहना है कि परियोजना की वास्तविक उपयोगिता इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, क्योंकि राज्य में बड़े बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट अक्सर देरी का सामना करते रहे हैं।
आगे की राह
सर्वेक्षण और भूमि चिह्नांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ADB की स्वीकृति मिल जाने के बाद अब परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना और निर्माण की समयसीमा तय होना अगला कदम होगा। इस परियोजना के पूर्ण होने पर कोटद्वार और पौड़ी गढ़वाल की बिजली व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार की संभावना है।