12 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे कुलदीप यादव और तिलक वर्मा, नंदी हॉल में 2 घंटे भस्म आरती के दर्शन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे कुलदीप यादव और तिलक वर्मा, नंदी हॉल में 2 घंटे भस्म आरती के दर्शन

सारांश

भारतीय क्रिकेटर कुलदीप यादव और तिलक वर्मा ने सोमवार तड़के उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में पहुंचकर भस्म आरती के दर्शन किए। नंदी हॉल में 2 घंटे बिताने के बाद दोनों खिलाड़ी काल भैरव मंदिर भी गए — आस्था और खेल का यह संगम चर्चा में है।

मुख्य बातें

कुलदीप यादव और तिलक वर्मा 12 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे।
दोनों खिलाड़ी तड़के 4 बजे मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में करीब 2 घंटे बैठकर भस्म आरती के दर्शन किए।
भस्म आरती के बाद दोनों ने गेट से बाबा का आशीर्वाद लिया और फिर काल भैरव मंदिर के दर्शन किए।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई; बाबा का भांग व चांदी के त्रिपुंड से शृंगार हुआ।
आश्विन शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार रात से ही कतारबद्ध थे।

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी कुलदीप यादव और तिलक वर्मा सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे। आश्विन शुक्ल पक्ष द्वितीया के पावन अवसर पर दोनों खिलाड़ियों ने नंदी हॉल में करीब 2 घंटे बैठकर भस्म आरती के अलौकिक दर्शन किए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।

तड़के 4 बजे मंदिर पहुंचे दोनों खिलाड़ी

कुलदीप यादव और तिलक वर्मा सोमवार तड़के 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पहुंचे। दोनों ने नंदी हॉल में स्थान ग्रहण कर भस्म आरती के संपूर्ण अनुष्ठान में भाग लिया। भस्म आरती के उपरांत दोनों खिलाड़ियों ने मंदिर के गेट से बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महाकाल दर्शन के बाद दोनों खिलाड़ी काल भैरव मंदिर के दर्शन करने भी गए।

भस्म आरती की दिव्य परंपरा

परंपरा के अनुसार, सोमवार को महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली जाती है, इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

पूजा और अभिषेक का क्रम

मंदिर के पट खुलने के साथ ही जलाभिषेक हुआ और फिर दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।

दिव्य शृंगार और श्रद्धालुओं का उत्साह

बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया। चांदी का त्रिपुंड और चंद्रमा धारण कर बाबा ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार रात से ही कतारबद्ध होकर दर्शन का इंतजार कर रहे थे। भस्म आरती के पश्चात पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

गौरतलब है कि उज्जैन की पावन नगरी में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती को अत्यंत दुर्लभ एवं पुण्यदायी माना जाता है। आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और著名 हस्तियों के यहाँ दर्शन के लिए आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कुलदीप और तिलक का तड़के 4 बजे भस्म आरती में शामिल होना यह दर्शाता है कि यह महज प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें खिलाड़ी मैदान के बाहर अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, मीडिया कवरेज में अक्सर यह सवाल छूट जाता है कि क्या ऐसी यात्राओं को प्रशिक्षण कार्यक्रम की स्वीकृति मिली है — खासकर जब टीम की आगामी सीरीज नज़दीक हो।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुलदीप यादव और तिलक वर्मा महाकालेश्वर मंदिर कब पहुंचे?
दोनों खिलाड़ी सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को तड़के 4 बजे उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में करीब 2 घंटे बैठकर भस्म आरती के दर्शन किए।
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर की अत्यंत दुर्लभ और पवित्र परंपरा है, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
दर्शन के बाद कुलदीप और तिलक कहाँ गए?
भस्म आरती और महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन के बाद दोनों क्रिकेटर उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर के दर्शन करने पहुंचे।
इस दिन भस्म आरती में बाबा का शृंगार कैसे हुआ?
आश्विन शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया और चांदी का त्रिपुंड एवं चंद्रमा धारण कर बाबा ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए।
श्री महाकालेश्वर मंदिर का क्या महत्व है?
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ की भस्म आरती को देश की सर्वाधिक पवित्र धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले