9 जुलाई 2026
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महाकाल का भांग-त्रिपुंड-त्रिशूल शृंगार, क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल व अभिनेत्री आंचल मुंजाल ने की भस्म आरती

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महाकाल का भांग-त्रिपुंड-त्रिशूल शृंगार, क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल व अभिनेत्री आंचल मुंजाल ने की भस्म आरती

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण नवमी पर भस्म आरती का दिव्य आयोजन हुआ — भांग, त्रिपुंड, त्रिशूल और डमरू से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल और अभिनेत्री आंचल मुंजाल भी पहुँचे।

मुख्य बातें

9 जुलाई 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष नवमी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को भांग का शृंगार , त्रिपुंड , त्रिशूल और डमरू से सजाया गया; पंचामृत अभिषेक किया गया।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल और अभिनेत्री आंचल मुंजाल ने भस्म आरती में दर्शन किए।
भस्म अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है, पहले श्मशान राख का उपयोग होता था।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 9 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष नवमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य आयोजन में पूर्व भारतीय क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल और अभिनेत्री आंचल मुंजाल ने भी बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही पंक्तिबद्ध होकर इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए उपस्थित रहे।

दिव्य शृंगार और भस्म आरती का आयोजन

गुरुवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल अर्पित किया गया।

इसके उपरांत बाबा महाकाल को भांग का शृंगार किया गया और उन्हें त्रिपुंड, त्रिशूल तथा डमरू से सुसज्जित किया गया। दिव्य भस्म आरती के पश्चात जैसे ही श्रद्धालुओं को दर्शन प्राप्त हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

भस्म आरती की विशेषता और परंपरा

गौरतलब है कि पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, परंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह परंपरा मंदिर की आस्था और अनुशासन की गहरी जड़ों को दर्शाती है।

क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल की प्रतिक्रिया

पूर्व भारतीय क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल ने बाबा महाकाल के दर्शन के बाद कहा, 'जब मैं यहाँ आता हूँ तो मुझे गहरी श्रद्धा महसूस होती है। मेरा मानना है कि यह बाबा का आशीर्वाद ही है जो मुझे बार-बार यहाँ खींच लाता है; यहाँ आने के बाद मुझे हमेशा बहुत अच्छा लगता है, जैसे मैं कोई नया इंसान बन गया हूँ।' कौल की यह यात्रा उनकी आस्था और महाकाल के प्रति उनके विशेष जुड़ाव को उजागर करती है।

अभिनेत्री आंचल मुंजाल का अनुभव

अभिनेत्री आंचल मुंजाल ने बताया कि उन्होंने एक दिन पूर्व संध्या आरती में भी भाग लिया था और गुरुवार को भस्म आरती में सम्मिलित हुईं। उन्होंने कहा, 'मैं इसे शब्दों में बयाँ नहीं कर सकती। आप जितनी चाहें उतनी तस्वीरें और वीडियो देख सकते हैं, लेकिन इसे खुद अनुभव करने पर जो ऊर्जा महसूस होती है, वैसी कहीं और महसूस नहीं हो सकती।' उनके इस अनुभव ने महाकाल की भस्म आरती की अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा को रेखांकित किया।

व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भीड़

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए जनसामान्य से लेकर बड़ी हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। मंदिर परिसर और उसके आसपास सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। आने वाले दिनों में भी श्रावण मास के निकट आने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बार-बार होने वाला आकर्षण यह भी दर्शाता है कि उज्जैन तेज़ी से एक 'आध्यात्मिक पर्यटन' गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यह उत्साहजनक है, किंतु प्रश्न यह भी उठता है कि बढ़ती भीड़ और वीआईपी दर्शनों के बीच सामान्य श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की मूल परंपराओं का संरक्षण कितना सुनिश्चित हो पा रहा है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल की भस्म आरती क्या है और इसका महत्व क्यों है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन की सबसे प्रतिष्ठित दैनिक पूजा है, जिसमें भगवान शिव को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। यह आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और इसे भगवान महाकाल के जागरण की सबसे पवित्र परंपरा माना जाता है।
9 जुलाई 2026 की भस्म आरती में कौन-कौन सी हस्तियाँ शामिल हुईं?
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सिद्धार्थ कौल और अभिनेत्री आंचल मुंजाल ने 9 जुलाई 2026 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दर्शन किए। आंचल मुंजाल ने एक दिन पूर्व संध्या आरती में भी भाग लिया था।
महाकाल की भस्म किससे बनती है?
अब महाकाल की भस्म विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है। पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन परंपरा में यह बदलाव किया गया है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनावा अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की परंपरा और अनुशासन का अभिन्न हिस्सा है।
9 जुलाई को बाबा महाकाल का शृंगार कैसा था?
आषाढ़ कृष्ण पक्ष नवमी पर बाबा महाकाल को भांग का शृंगार किया गया और त्रिपुंड, त्रिशूल तथा डमरू से सुसज्जित किया गया। पंचामृत अभिषेक और जलाभिषेक के बाद दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
राष्ट्र प्रेस
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