महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ पंचमी पर भव्य भस्म आरती, त्रिशूल-डमरू और भांग से हुआ बाबा का दिव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष पंचमी के पावन अवसर पर रविवार, 5 जुलाई 2026 को बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग अर्पित कर बाबा का विशेष शृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।
कपाट उद्घाटन और दिव्य अनुष्ठान
तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल भी समर्पित किया गया।
भस्म आरती की विशेषता और परंपरा
जानकारों के अनुसार, पूर्व में बाबा महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा के साथ-साथ आधुनिक स्वच्छता मानकों के प्रति मंदिर प्रशासन की सजगता को दर्शाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं का उत्साह और माहौल
दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टनकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ा। मंदिर के पुजारी ने महाआरती विधिवत संपन्न कराई।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक इंतज़ाम
गौरतलब है कि बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसके दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे व्यवस्था सुचारु रही। आषाढ़ माह में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से बढ़ जाती है, क्योंकि यह माह शिव उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।