13 जुलाई 2026
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कुमारस्वामी ने बर्नपुर में IISCO का 84,000 घन मीटर जलाशय उद्घाटित किया, 4.08 MTPA विस्तार को मिलेगी रफ्तार

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कुमारस्वामी ने बर्नपुर में IISCO का 84,000 घन मीटर जलाशय उद्घाटित किया, 4.08 MTPA विस्तार को मिलेगी रफ्तार

सारांश

केंद्रीय इस्पात मंत्री कुमारस्वामी का बर्नपुर दौरा महज़ औपचारिकता नहीं था — यह IISCO के कायाकल्प की रूपरेखा थी। 84,000 घन मीटर के जलाशय का उद्घाटन और ₹1,860 करोड़ के पूंजीगत व्यय की समीक्षा यह संकेत देती है कि सार्वजनिक क्षेत्र का यह ऐतिहासिक प्लांट 4.08 MTPA विस्तार की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 12 जुलाई को बर्नपुर में IISCO स्टील प्लांट का दौरा किया।
नवनिर्मित RCC जलाशय की क्षमता 84,000 घन मीटर ; यह 4.08 MTPA विस्तार परियोजना को जल आपूर्ति देगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में IISCO का पूंजीगत व्यय ₹1,860 करोड़ — पिछले वर्ष के ₹689 करोड़ से लगभग 2.7 गुना अधिक।
प्लांट ने वित्त वर्ष 2025-26 में 29 लाख टन हॉट मेटल का उत्पादन किया।
COB-12 और क्लोज्ड-लूप वॉटर सर्कुलेशन सिस्टम से सस्टेनेबल उत्पादन और दक्षता में सुधार की उम्मीद।
बैठक में SAIL CMD अशोक कुमार पांडा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने रविवार, 12 जुलाई को पश्चिम बंगाल के बर्नपुर स्थित आईआईएससीओ स्टील प्लांट (ISP) में नवनिर्मित आरसीसी जल भंडार का उद्घाटन किया। स्टील मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह जलाशय प्लांट की भावी 4.08 MTPA क्षमता विस्तार योजना की जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। यह दौरा केंद्रीय मंत्री की तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल यात्रा का पहला दिन था।

जलाशय की विशेषताएँ और एकीकृत जल प्रणाली

नवनिर्मित रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट (RCC) वॉटर रिज़र्वॉयर की भंडारण क्षमता 84,000 घन मीटर है। यह जलाशय मुख्य रूप से COB-10 (कोक ओवन बैटरी) की जल आवश्यकताओं को पूरा करेगा और साथ ही स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के अंतर्गत संचालित इस प्लांट के विस्तार प्रोजेक्ट को सहयोग देगा।

अधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि इस एकीकृत प्रणाली में नवनिर्मित बूस्टर पंप हाउस, COB-10 के लिए समर्पित पंप हाउस और निर्माणाधीन प्रोसेस वॉटर पंप हाउस शामिल हैं। ये सभी इकाइयाँ मिलकर एक क्लोज्ड-लूप वॉटर सर्कुलेशन सिस्टम का निर्माण करेंगी, जिससे जल की बचत बढ़ेगी, नुकसान घटेगा और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

COB-12 और ब्लास्ट फर्नेस का निरीक्षण

कुमारस्वामी ने अपने दौरे की शुरुआत COB-12 (स्टैम्प चार्ज कोक ओवन बैटरी) परियोजना के निरीक्षण से की, जो आईआईएससीओ की क्षमता वृद्धि की प्रमुख पहलों में से एक है। वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें बैटरी प्रॉपर, कोक ड्राई कूलिंग प्लांट (CDQ), बाय-प्रोडक्ट प्लांट और आधुनिक पर्यावरण संरक्षण प्रणालियों की प्रगति से अवगत कराया।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस का निरीक्षण किया और परिचालन प्रदर्शन, उत्पादन मानकों तथा चल रही आधुनिकीकरण पहलों की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 29 लाख टन हॉट मेटल का उत्पादन किया, जो निरंतर बेहतर होती उत्पादकता का संकेत है। कुमारस्वामी ने ब्लास्ट फर्नेस कंट्रोल रूम का भी दौरा किया और इंजीनियरों व कर्मचारियों से सीधे संवाद किया।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक और पूंजीगत व्यय में बड़ी छलांग

निरीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आईआईएससीओ स्टील प्लांट के समग्र प्रदर्शन पर एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। इसमें SAIL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार पांडा, आईआईएससीओ के डायरेक्टर इन-चार्ज, कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

बैठक में उत्पादन प्रदर्शन, आधुनिकीकरण परियोजनाओं, क्षमता विस्तार, सस्टेनेबिलिटी पहलों, पूंजीगत व्यय, तकनीकी अंगीकरण और भविष्य की विकास रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ। कुमारस्वामी ने पूंजीगत व्यय में हुई उल्लेखनीय वृद्धि की सराहना की — आईआईएससीओ ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1,860 करोड़ का पूंजीगत व्यय किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹689 करोड़ था — यानी एक वर्ष में लगभग 2.7 गुना की वृद्धि।

सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात पारितंत्र को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता

गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने पर ज़ोर दे रही है। कुमारस्वामी ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक विस्तार परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भारत की इस्पात विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह तीन दिवसीय दौरा प्लांट के विस्तार, इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्टेनेबिलिटी और कर्मचारी कल्याण की व्यापक समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

860 करोड़ का पूंजीगत व्यय एक वर्ष में 2.7 गुना उछाल दर्शाता है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह निवेश समयबद्ध उत्पादन लक्ष्यों में तब्दील होता है। सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों का इतिहास बताता है कि पूंजीगत व्यय घोषणाएँ और वास्तविक क्षमता वृद्धि के बीच अक्सर लंबा अंतराल रहता है। 4.08 MTPA विस्तार परियोजना की समयसीमा और रोज़गार पर इसके ठोस प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं हैं। जब तक स्वतंत्र प्रगति सत्यापन तंत्र नहीं होगा, ये आँकड़े उत्साहजनक तो हैं, पर पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IISCO बर्नपुर में नए RCC जलाशय का क्या उद्देश्य है?
यह 84,000 घन मीटर क्षमता का जलाशय COB-10 की जल आवश्यकताओं को पूरा करने और IISCO स्टील प्लांट की 4.08 MTPA विस्तार परियोजना को जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। यह क्लोज्ड-लूप वॉटर सर्कुलेशन सिस्टम का हिस्सा है, जो जल बचत और परिचालन दक्षता बढ़ाएगा।
IISCO स्टील प्लांट का वित्त वर्ष 2025-26 में उत्पादन कितना रहा?
IISCO स्टील प्लांट ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 29 लाख टन हॉट मेटल का उत्पादन किया। अधिकारियों के अनुसार यह निरंतर बेहतर होती परिचालन उत्पादकता का संकेत है।
IISCO के पूंजीगत व्यय में कितनी वृद्धि हुई है?
IISCO ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1,860 करोड़ का पूंजीगत व्यय किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹689 करोड़ था — यानी एक वर्ष में लगभग 2.7 गुना की वृद्धि। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इस बढ़ोतरी की सराहना की।
COB-12 परियोजना IISCO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
COB-12 (स्टैम्प चार्ज कोक ओवन बैटरी) IISCO की क्षमता वृद्धि की प्रमुख पहलों में से एक है। इसमें कोक ड्राई कूलिंग प्लांट (CDQ), बाय-प्रोडक्ट प्लांट और आधुनिक पर्यावरण संरक्षण प्रणालियाँ शामिल हैं, जो सस्टेनेबल इस्पात उत्पादन और परिचालन दक्षता में सुधार लाएंगी।
कुमारस्वामी की पश्चिम बंगाल यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी की यह तीन दिवसीय यात्रा बर्नपुर के IISCO स्टील प्लांट के विस्तार प्रोजेक्ट्स, उत्पादन सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्टेनेबिलिटी पहलों और कर्मचारी कल्याण की व्यापक समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। यह दौरा सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात पारितंत्र को सुदृढ़ करने की सरकारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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