20 जुलाई 2026
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क्या त्रिपुरा के कुमारघाट में सांप्रदायिक झड़पों के बाद निषेधाज्ञा लागू हुई?

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क्या त्रिपुरा के कुमारघाट में सांप्रदायिक झड़पों के बाद निषेधाज्ञा लागू हुई?

सारांश

त्रिपुरा के कुमारघाट में साम्प्रदायिक झड़पों के बाद भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। स्थानीय मेले के लिए चंदा वसूली को लेकर हुई झड़पों में कई लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। जानें पूरी स्थिति और सुरक्षा बलों की कार्रवाई।

मुख्य बातें

कुमारघाट में सांप्रदायिक झड़पें हुईं।
कम से कम पांच से छह लोग घायल हुए।
इंटरनेट सेवाएं 48 घंटे के लिए बंद की गईं।
प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू की।
राजनीतिक नेताओं ने शांति की अपील की।

अगरतला, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के कुमारघाट उपमंडल में शनिवार को दो समुदायों के बीच स्थानीय मेले के लिए चंदा वसूली को लेकर हुई झड़पों के बाद निषेधाज्ञा लागू कर दी गई और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए। इस घटना में कम से कम पांच से छह लोग घायल हो गए, जबकि कुछ घरों में आग लगा दी गई।

एहतियातन कुमारघाट उपमंडल में 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। मामले में अब तक कम से कम आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

उनाकोटी जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर सभी इंटरनेट सेवाएं बंद करने का अनुरोध किया। पत्र में कहा गया कि फटिकरॉय थाना क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा के बाद अचानक और गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

पत्र में एसपी ने कहा, “झूठे प्रचार और भड़काऊ संदेशों के प्रसार पर रोक लगाने के लिए एहतियातन इंटरनेट सेवाएं बंद करना आवश्यक हो गया है।”

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब फटिकरॉय थाना क्षेत्र के सैदरपाड़ा इलाके में कुछ युवकों ने लकड़ी से लदे एक वाहन को रोककर सामुदायिक मेले के लिए चंदा मांगा।

इसके बाद आगजनी, तोड़फोड़ और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें एक धार्मिक स्थल को भी नुकसान पहुंचाया गया। हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए कुमारघाट के उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 लागू कर दी।

बताया गया है कि शिमुलतला इलाके में एक अल्पसंख्यक परिवार द्वारा मेले के लिए चंदा देने से कथित तौर पर इनकार करने के बाद तनाव बढ़ गया। इसके बाद उग्र भीड़ ने लकड़ी की एक दुकान सहित कई संपत्तियों में आग लगा दी और एक धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ की। मिश्रित आबादी वाले इलाके में खबर फैलते ही स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक अविनाश राय, जिला मजिस्ट्रेट तमल मजूमदार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अतिरिक्त बल लेकर प्रभावित इलाकों में पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

मीडिया से बातचीत में राय ने कहा, “दिन में पहले कुछ लोगों द्वारा कुछ घरों के बाहर आग लगाए जाने की घटनाओं के बाद तनाव पैदा हुआ। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर भीड़ को तितर-बितर किया। स्थिति को देखते हुए एसडीएम ने धारा 163 लागू की है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। फ्लैग मार्च जारी रहेंगे, हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।”

नुकसान के आकलन को लेकर उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा विस्तृत सर्वे किया जा रहा है।

पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने फ्लैग मार्च किए, जबकि कुछ इलाकों में तनाव बना रहा। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहें न फैलाने की अपील की है।

इस बीच राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीब भट्टाचार्जी, राज्य कांग्रेस अध्यक्ष आशीष कुमार साहा और नेता प्रतिपक्ष व माकपा के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने अलग-अलग बयान जारी कर हिंसा की निंदा की और शांति व सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारघाट में क्या हुआ?
कुमारघाट में स्थानीय मेले के लिए चंदा वसूली को लेकर दो समुदायों के बीच झड़पें हुईं।
इंटरनेट सेवाएं क्यों बंद की गईं?
सांप्रदायिक हिंसा की स्थिति को देखते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं।
क्या प्रशासन ने कोई कार्रवाई की?
प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू की और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए।
क्या राजनीतिक नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी?
हां, विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने हिंसा की निंदा की और शांति बनाए रखने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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