क्या कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने की संभावना है? बोत्सवाना से जनवरी में आएंगे 8 नए चीते
सारांश
Key Takeaways
- कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
- बोत्सवाना से 8 नए चीतों का आगमन होगा।
- यह प्रोजेक्ट चीता जैव विविधता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
- कूनो में चीतों की संख्या 35 के करीब पहुंच सकती है।
- स्थानीय समुदाय को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
श्योपुर, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। 'प्रोजेक्ट चीता' के अंतर्गत बोत्सवाना से 8 नए चीतों की खेप जनवरी 2026 में आने की उम्मीद है। ये चीते क्वारंटाइन पूरा करने के बाद विशेष विमान से भारत लाए जाएंगे। इस खेप में नर और मादा चीतों का समावेश होगा, जो पार्क में मौजूदा चीतों की आबादी को और मजबूत करेंगे। वर्तमान में भारत में चीतों की कुल संख्या 30 है, जिसमें कूनो में 27 और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3 चीते हैं।
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 2022 में नामीबिया से 8 चीतों के साथ हुई थी, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर कूनो में छोड़ा था। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों का आगमन हुआ। इन चीतों ने भारतीय वातावरण में अच्छी तरह से ढलने में सफलता हासिल की है और यहां शावकों का जन्म भी हो रहा है। 2025 में तीन मादा चीतों ने कुल 12 शावकों को जन्म दिया, हालांकि तीन शावकों की मृत्यु हो गई। फिर भी भारत में जन्मे शावकों की संख्या बढ़कर 19 के करीब पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रारंभिक वर्षों में कुछ मौतें सामान्य हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट सफलता की दिशा में बढ़ रहा है।
हाल ही में बोत्सवाना का एक तीन सदस्यीय दल ने कूनो और गांधी सागर का दौरा किया। इस दल में पशु चिकित्सक, सुरक्षा अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल थे। उन्होंने बाड़ों, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की और संतोष व्यक्त किया। कूनो के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि पार्क नई खेप के लिए पूरी तरह तैयार है। नए चीतों के आगमन से जैव विविधता में वृद्धि होगी और घास के मैदानों का इकोसिस्टम मजबूत होगा।
कूनो में चीतों के दीदार के लिए पर्यटकों की संख्या में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। सफारी बुकिंग में इजाफा हुआ है और लोग दुनिया के सबसे तेज धावक को करीब से देखने आ रहे हैं। इसके अलावा गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा घर बन चुका है, जहां तीन चीते शिफ्ट किए गए हैं। सागर जिले का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पहले नौरादेही) को तीसरा केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है, जिसे 2026 मानसून से पहले तैयार किया जाएगा।
यह प्रोजेक्ट न केवल चीतों की संख्या बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय समुदाय को रोजगार और संरक्षण के प्रति जागरूकता भी दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में चीतों की स्थायी आबादी स्थापित हो जाएगी। नए चीतों के आगमन से कूनो में चीतों की संख्या 35 के करीब पहुंच सकती है, जो प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता होगी।