कुरुक्षेत्र में कश्मीरी बस पर हमला: ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन का आक्रोश, FIR न होने पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक कश्मीरी स्लीपर बस पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है और केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार तथा जम्मू-कश्मीर प्रशासन से तत्काल न्याय की माँग की है। फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने 18 अक्टूबर 2026 को कुपवाड़ा से इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि हमलावरों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो दशकों से बना भाईचारा खतरे में पड़ सकता है।
हमले की पृष्ठभूमि और ट्रांसपोर्टरों की प्रतिक्रिया
कुरुक्षेत्र में एक कश्मीरी स्लीपर बस पर हमला होने की खबर मिलते ही घाटी के परिवहन व्यवसायियों में भारी आक्रोश फैल गया। मीर मोहम्मद शफी ने बताया कि जैसे ही घटना सामने आई, उन्होंने कश्मीर बस एंड स्लीपर बस एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान बक्शी से संपर्क किया, जो काफी व्यथित थे और रात भर सो नहीं पाए। शफी ने कहा कि उनकी पूरी टीम इस घटना से विचलित है।
शफी के अनुसार, यह हमला किसी एक बस पर नहीं, बल्कि समूचे कश्मीरी परिवहन समुदाय पर हमला है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सोशल मीडिया पोस्ट को अपर्याप्त बताते हुए ठोस और ज़मीनी कार्रवाई की माँग की।
दोहरे मापदंड पर सवाल
शफी ने दोहरे मापदंड का हवाला देते हुए तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'अगर ये घटना कश्मीर में हुई होती, तो हम लोग जेल में होते। हम पर PSA लगा दिया गया होता।' उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति ने पिस्टल लहराई, लोगों को लाया और बस पर हमला किया, उसके खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज होने की सूचना भी नहीं मिली।
उन्होंने हरियाणा और केंद्र सरकार से सीधा सवाल पूछा — 'क्या कश्मीरी अब कहीं काम नहीं कर सकता? क्या कश्मीरी अब बाहर गाड़ी लेकर नहीं जा सकता? आखिर जम्मू-कश्मीर की गाड़ियों को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है?'
रोज़गार और भाईचारे पर असर
शफी ने चेताया कि अगर रास्ते में पत्थर मारे जाएँगे तो यात्री कश्मीरी बसों में बैठने से डरेंगे, जिससे ट्रांसपोर्टरों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, 'हमारा रोज़गार इसी पर टिका है।'
उन्होंने भाईचारे का हवाला देते हुए यह भी कहा कि जब कश्मीर में हालात खराब थे तब भी बाहर के ड्राइवर वहाँ आते थे और कश्मीरियों ने कभी किसी बाहरी गाड़ी पर खरोंच तक नहीं आने दी। शफी ने स्पष्ट किया कि वे भाईचारे को खतरे में नहीं डालना चाहते, लेकिन यदि ऐसी घटनाएँ नहीं रुकीं तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
माँगें और आगे की राह
कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से इस मामले में दखल देने की अपील की है। उनकी प्रमुख माँगें हैं — निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, घायलों को उचित मुआवजा, बस को हुए नुकसान की भरपाई और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
शफी ने दिल्ली, हरियाणा और जम्मू समेत सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आगे आने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके जो भी नतीजे होंगे उसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी। यह मामला अब जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के बीच परिवहन संबंधों तथा अंतर-राज्यीय सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।