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कुरुक्षेत्र में कश्मीरी बस पर हमला: ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन का आक्रोश, FIR न होने पर उठाए सवाल

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कुरुक्षेत्र में कश्मीरी बस पर हमला: ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन का आक्रोश, FIR न होने पर उठाए सवाल

सारांश

कुरुक्षेत्र में कश्मीरी स्लीपर बस पर हमला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रही — यह जम्मू-कश्मीर के परिवहन समुदाय के लिए आजीविका और भाईचारे दोनों का सवाल बन गई है। एफआईआर न होने का आरोप और दोहरे मापदंड की चर्चा ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है।

मुख्य बातें

कुरुक्षेत्र , हरियाणा में एक कश्मीरी स्लीपर बस पर हमला हुआ, जिसमें यात्री घायल हुए और बस को नुकसान पहुँचा।
कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।
शफी का आरोप — हमलावर के खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं; जबकि कश्मीर में होता तो PSA लग जाता।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सोशल मीडिया पोस्ट को अपर्याप्त बताया, ठोस ज़मीनी कार्रवाई की माँग।
फेडरेशन ने केंद्र सरकार , हरियाणा सरकार , गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील की।
घायलों को मुआवजा और बस के नुकसान की भरपाई की माँग; सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों से एकजुटता की अपील।

कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक कश्मीरी स्लीपर बस पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है और केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार तथा जम्मू-कश्मीर प्रशासन से तत्काल न्याय की माँग की है। फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने 18 अक्टूबर 2026 को कुपवाड़ा से इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि हमलावरों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो दशकों से बना भाईचारा खतरे में पड़ सकता है।

हमले की पृष्ठभूमि और ट्रांसपोर्टरों की प्रतिक्रिया

कुरुक्षेत्र में एक कश्मीरी स्लीपर बस पर हमला होने की खबर मिलते ही घाटी के परिवहन व्यवसायियों में भारी आक्रोश फैल गया। मीर मोहम्मद शफी ने बताया कि जैसे ही घटना सामने आई, उन्होंने कश्मीर बस एंड स्लीपर बस एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान बक्शी से संपर्क किया, जो काफी व्यथित थे और रात भर सो नहीं पाए। शफी ने कहा कि उनकी पूरी टीम इस घटना से विचलित है।

शफी के अनुसार, यह हमला किसी एक बस पर नहीं, बल्कि समूचे कश्मीरी परिवहन समुदाय पर हमला है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सोशल मीडिया पोस्ट को अपर्याप्त बताते हुए ठोस और ज़मीनी कार्रवाई की माँग की।

दोहरे मापदंड पर सवाल

शफी ने दोहरे मापदंड का हवाला देते हुए तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'अगर ये घटना कश्मीर में हुई होती, तो हम लोग जेल में होते। हम पर PSA लगा दिया गया होता।' उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति ने पिस्टल लहराई, लोगों को लाया और बस पर हमला किया, उसके खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज होने की सूचना भी नहीं मिली।

उन्होंने हरियाणा और केंद्र सरकार से सीधा सवाल पूछा — 'क्या कश्मीरी अब कहीं काम नहीं कर सकता? क्या कश्मीरी अब बाहर गाड़ी लेकर नहीं जा सकता? आखिर जम्मू-कश्मीर की गाड़ियों को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है?'

रोज़गार और भाईचारे पर असर

शफी ने चेताया कि अगर रास्ते में पत्थर मारे जाएँगे तो यात्री कश्मीरी बसों में बैठने से डरेंगे, जिससे ट्रांसपोर्टरों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, 'हमारा रोज़गार इसी पर टिका है।'

उन्होंने भाईचारे का हवाला देते हुए यह भी कहा कि जब कश्मीर में हालात खराब थे तब भी बाहर के ड्राइवर वहाँ आते थे और कश्मीरियों ने कभी किसी बाहरी गाड़ी पर खरोंच तक नहीं आने दी। शफी ने स्पष्ट किया कि वे भाईचारे को खतरे में नहीं डालना चाहते, लेकिन यदि ऐसी घटनाएँ नहीं रुकीं तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

माँगें और आगे की राह

कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से इस मामले में दखल देने की अपील की है। उनकी प्रमुख माँगें हैं — निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, घायलों को उचित मुआवजा, बस को हुए नुकसान की भरपाई और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

शफी ने दिल्ली, हरियाणा और जम्मू समेत सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आगे आने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके जो भी नतीजे होंगे उसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी। यह मामला अब जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के बीच परिवहन संबंधों तथा अंतर-राज्यीय सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि उस 'एक देश, एक कानून' की भावना पर सीधा प्रहार है जिसे सरकार बार-बार रेखांकित करती है। शफी की चेतावनी — कि चुप्पी से भाईचारा खतरे में पड़ेगा — महज़ भावनात्मक बयान नहीं है; यह उस परिवहन नेटवर्क की व्यावहारिक हकीकत है जो दोनों क्षेत्रों की आर्थिक कड़ी है। सरकारों को सोशल मीडिया पोस्ट से आगे जाकर त्वरित कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा प्रोटोकॉल का ब्यौरा देना होगा, वरना यह मामला व्यापक अविश्वास का केंद्र बन सकता है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुरुक्षेत्र में कश्मीरी बस पर हमला क्या हुआ?
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कश्मीर जा रही एक कश्मीरी स्लीपर बस पर हमला हुआ, जिसमें यात्री घायल हुए और बस को नुकसान पहुँचा। कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के अनुसार हमलावर ने पिस्टल लहराई और लोगों को इकट्ठा कर बस पर हमला किया।
कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने क्या माँगें रखी हैं?
फेडरेशन ने निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, घायल यात्रियों को उचित मुआवजा, बस के नुकसान की भरपाई और भविष्य में ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। इसके लिए केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार, गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील की गई है।
मीर मोहम्मद शफी ने दोहरे मापदंड का आरोप क्यों लगाया?
शफी ने कहा कि यदि यही घटना कश्मीर में हुई होती तो कश्मीरी ट्रांसपोर्टरों पर PSA (सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम) लगाकर जेल भेज दिया जाता। लेकिन कुरुक्षेत्र में बस पर हमला करने वाले व्यक्ति के खिलाफ उन्हें अभी तक किसी एफआईआर दर्ज होने की सूचना नहीं मिली।
इस हमले का कश्मीरी ट्रांसपोर्टरों के रोज़गार पर क्या असर होगा?
फेडरेशन का कहना है कि यदि अंतर-राज्यीय मार्गों पर कश्मीरी बसों पर हमले होते रहे तो यात्री इन बसों में बैठने से डरेंगे, जिससे ट्रांसपोर्टरों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी। शफी ने कहा, 'हमारा रोज़गार इसी पर टिका है।'
उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया पर ट्रांसपोर्टरों ने क्या कहा?
कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सोशल मीडिया पोस्ट को अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से काम नहीं चलेगा — इस मामले में ठोस और ज़मीनी कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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