क्या 2026 में केरल में भाजपा का दबदबा कायम होगा?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा का 2026 में केरल पर ध्यान केंद्रित।
- तिरुवनंतपुरम में जीत का महत्व।
- दक्षिण भारत में भाजपा की जमीनी तैयारियाँ।
- पश्चिम बंगाल के चुनावों की तैयारी।
- तमिल भाषा से तमिलनाडु को जोड़ने का प्रयास।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान में देश के 21 राज्यों में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हौसले भविष्य की ओर ऊंचे हैं। साल 2025 में राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के चलते, दिल्ली में भाजपा का प्रभाव फिर से मजबूत हुआ। कुछ महीनों में, भाजपा ने बिहार में भी अपनी स्थिति को मज़बूत किया और धीरे-धीरे केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम भाजपा के रंग में रंग गई। यह जीत केवल एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2026 में दक्षिण भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव की आहट मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल के अलावा, केरल और तमिलनाडु में 2026 में चुनाव होने वाले हैं। उत्तर भारत में भाजपा का परचम पहले से ही लहरा रहा है, और पार्टी की नजरें अब दक्षिण भारत पर हैं, जहां कर्नाटक को छोड़कर अब तक सत्ता का अनुभव नहीं मिला।
बिहार में जीत के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने अगला लक्ष्य पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ाने की घोषणा की है, लेकिन तमिलनाडु और विशेषकर केरल में भाजपा की तैयारी इस बात को स्पष्ट करती है। तिरुवनंतपुरम की जीत इसका एक ताजा उदाहरण है।
पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु की विधानसभाओं का कार्यकाल मई में समाप्त होगा। 7 मई को वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होगा, जबकि तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई और केरल विधानसभा का 23 मई है। इससे पहले नई विधानसभा का चुनाव होना आवश्यक है।
चुनावों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दौरे शुरू हो चुके हैं, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया यात्रा शामिल है। 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने तमिल भाषा का उल्लेख करके तमिलनाडु को जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने 28 दिसंबर को 'मन की बात' में काशी के स्कूलों में तमिल भाषा सिखाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की चर्चा की।
तिरुवनंतपुरम की जीत को भाजपा की दक्षिणी दस्तक के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।