क्या अखिल भारतीय संत समिति ने मां शृंगार गौरी का पूजन किया? 9 दिनों तक चलने वाली कथा का शुभारंभ!
सारांश
Key Takeaways
- मां शृंगार गौरी का विधिपूर्वक पूजन किया गया।
- 9 दिनों की राम कथा का आयोजन।
- संत समिति ने धार्मिक परंपरा को जीवित रखा।
- ज्ञानवापी का विवाद कोर्ट में चल रहा है।
वाराणसी, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ज्ञानवापी में व्यास जी के तहखाने की पश्चिमी दीवार पर मां शृंगार गौरी का विधि-विधान से पूजन किया गया।
अखिल भारतीय संत समिति ने मां शृंगार गौरी का विधि-विधान के साथ पूजन किया और ज्ञानवापी परिसर में राम कथा का आयोजन किया है। यह कथा अगले 9 दिनों तक चलने वाली है।
मां गौरी के शृंगार पूजन की परंपरा काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में एक शताब्दी से अधिक समय से की जा रही है। हर साल की तरह इस साल भी पश्चिमी दीवार के पास यह पूजन संपन्न हुआ। संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी परिसर की तरफ मुंह किए बड़े नंदी महाराज का पूजन किया और मां गौरी के विग्रह का फूल और मालाओं के साथ पूजन किया। इसके साथ बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर मां की आरती उतारी गई।
महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा, "काशी विश्वनाथ मंदिर को 7 बार तोड़ा गया, लेकिन जब औरंगजेब के आदेश पर मंदिर को नष्ट किया गया, तो काशी के वैदिक ब्राह्मणों ने तय किया कि भविष्य में हमारे मंदिरों का क्या प्रमाण रहेगा?" इसलिए उन्होंने शृंगार गौरी के मंदिर के अवशेष की पूजा-पाठ आरंभ की और काशी विश्वनाथ मंदिर में राम कथा सुनाने का निर्णय लिया।
उन्होंने आगे कहा, "1965 तक हर साल कथा चलती रही और किसी ने इसे रोका नहीं। आज तक यह कथा जारी है। आज मां शृंगार गौरी का विधिवत पूजन हुआ और बाबा काशी विश्वनाथ से प्रार्थना की गई कि ज्ञानवापी का परिसर आततायियों से मुक्त हो।"
ज्ञात हो कि ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार पर लगे सिंदूर के निशान को मां शृंगार गौरी के रूप में पूजा जाता है, जहां दीवार पर एक लाल टीका लगा है। विवादित स्थल को लेकर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। काशी की 4 महिलाओं ने मां शृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। वर्तमान में नवरात्रि के पहले दिन ही दर्शन का अवसर मिलता है, वो भी चौखट के। मां शृंगार गौरी का मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।