क्या भारत ब्रिक्स में चीन की तरह ही आवश्यक है? - मार्क गयोन
सारांश
Key Takeaways
- भारत का ब्रिक्स में योगदान महत्वपूर्ण है।
- मार्क गयोन का भारत दौरा वैश्विक सहयोग पर केंद्रित है।
- शांति की ताकत के रूप में भारत की पहचान बढ़ रही है।
- फ्रांस और भारत के बीच सहयोग की संभावनाएँ।
- एशिया में संतुलन बनाने का अवसर।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। हांगकांग और मकाऊ में फ्रांसीसी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले काउंसलर और पैट्रियटिक रिन्यूअल मूवमेंट के संस्थापक मार्क गयोन इस समय राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए दिल्ली में हैं। इस दौरान, उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ एक विशेष बातचीत की। यह उनका भारत का पहला दौरा है।
काउंसलर मार्क गयोन ने भारत और फ्रांस की भागीदारी पर कहा, "मुझे लगता है कि कई साझेदारियों की आवश्यकता है। मैं इस विषय में ज्यादा जानकारी नहीं रखता, क्योंकि मैं हांगकांग और मकाऊ के लिए चुना गया हूं, लेकिन मुझे लगता है कि संस्कृतिक सहयोग, शिक्षा, इंजीनियरिंग और एआई के संदर्भ में बहुत कुछ करना और बढ़ावा देना है।"
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बारे में उन्होंने कहा, "यह अच्छा है। मैं अपने राष्ट्रपति का समर्थन नहीं कर रहा हूं, लेकिन वह राष्ट्रपति हैं। मुझे पता है कि वह एशिया जा रहे हैं और चीन भी जा रहे हैं। इसलिए यह अच्छा है कि वह भारत आ रहे हैं, जब तक हम अच्छी भागीदारी बना सकते हैं। मुझे नहीं पता कि वह यहाँ क्या करने वाले हैं। कोई एयरक्राफ्ट या किसी भी प्रकार के सहयोग पर चर्चा हो सकती है।"
पीएम मोदी के नेतृत्व को लेकर मार्क गयोन ने कहा, "भारत ने पिछले कुछ वर्षों में बहुत प्रगति की है। भारत ब्रिक्स में चीन जैसे कई देशों की तरह ही आवश्यक होता जा रहा है। दुनिया में भारत का प्रभाव और भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण होती जा रही है और मुझे उम्मीद है कि यह बढ़ेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत रूस, चीन और पूरे एशिया के साथ मिलकर दुनिया भर में ताकतों के बीच संतुलन बनाने और विकास के लिए अधिक काम कर सकता है, तो यह अच्छा है।
भारत की ओर से यूएन में सुधार की जो मांग की जा रही है, उस पर मार्क गयोन ने कहा, "स्थायी काउंसिल के सदस्य दूसरे विश्व युद्ध के विजेता हैं। मुझे इस पर गर्व है, लेकिन मुझे लगता है कि भारत अब की तुलना में शांति की ताकत है। हमारे अपने फ्रांस के राष्ट्रपति रूस और यूक्रेन में युद्ध इत्यादि की बात कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह गलत है। अभी फ्रांस से ज्यादा भारत शांति को बढ़ावा दे रहा है।"