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समुद्र के बीच आवश्यक सामग्री पहुँचाने में सक्षम स्वदेशी 'एडीसी-150'

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समुद्र के बीच आवश्यक सामग्री पहुँचाने में सक्षम स्वदेशी 'एडीसी-150'

सारांश

भारतीय नौसेना और डीआरडीओ ने गोवा में सफल परीक्षण किए हैं, जिससे नौसैनिक जहाजों तक आवश्यक सामग्री का वितरण सरल होगा। यह 'एडीसी-150' कंटेनर, 150 किलोग्राम तक का सामान ले जाने में सक्षम है।

मुख्य बातें

एडीसी-150 एक स्वदेशी तकनीक है जो नौसेना की सहायता करेगी।
इसकी 150 किलोग्राम की पेलोड क्षमता है।
यह समुद्र के बीच आवश्यक सामग्री पहुँचाने में मदद करेगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह पूरी तरह स्वदेशी है।
इसका अगला कदम नौसेना में इसका उपयोग करना है।

नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, जिसे डीआरडीओ के नाम से जाना जाता है, और भारतीय नौसेना ने गोवा के तट पर स्वदेशी रूप से विकसित एयर-ड्रॉपेबल कंटेनर 'एडीसी -150' के चार सफल इन-फ्लाइट रिलीज ट्रायल किए हैं। यह तकनीक समुद्र के बीच तैनात नौसैनिक जहाजों तक आवश्यक सामग्री पहुँचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कंटेनर का नाम 'एडीसी-150' रखा गया है, जो नौसेना के विभिन्न मिशनों और अभियानों में सहायक सिद्ध होगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये ट्रायल गोवा के समुद्र तट पर 21 फरवरी से 1 मार्च के बीच संपन्न हुए। नौसेना के पी 8 आई विमान से इस कंटेनर को हवा में गिराया गया। परीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि यह विभिन्न और कठिन परिस्थितियों में सही तरीके से नीचे उतरता है या नहीं। कुल चार बार इस परीक्षण को अंजाम दिया गया और सभी परीक्षण सफल रहे। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी 150 किलोग्राम की क्षमता है। यह कंटेनर 150 किलोग्राम तक का सामान जैसे दवाइयाँ, स्पेयर पार्ट्स या खाद्य सामग्री ले जाने में सक्षम है।

इसकी सुरक्षा के लिए एक विशेष पैराशूट सिस्टम का निर्माण किया गया है। हवा से गिराए जाने के बाद इसमें लगा पैराशूट खुल जाता है, जिससे सामान सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरता है।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है। इसे भारत में ही विकसित किया गया है। आगरा, बेंगलुरु, हैदराबाद, और विशाखापत्तनम की सरकारी प्रयोगशालाओं ने इसमें योगदान दिया है। इससे नौसेना को समय पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति संभव हो सकेगी। अक्सर जब नौसेना के जहाज तट से दूर होते हैं तो आवश्यक सामग्री पहुँचाना मुश्किल होता है, लेकिन अब इस कंटेनर की मदद से यह सामान सीधे उन तक पहुँचाया जा सकेगा। इसका अगला कदम इस तकनीक का नौसेना के उपयोग में लाना है।

विकासात्मक परीक्षणों के सफल होने के बाद, इस प्रणाली को जल्द ही भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। इसकी मुख्य विशेषताओं में 150 किलोग्राम पेलोड क्षमता शामिल है, जिससे यह कंटेनर विभिन्न प्रकार के सामान या भार ले जाने में सक्षम है। यह समुद्र में तैनात नौसैनिक जहाजों को आपातकालीन सहायता पहुँचाने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। इसके माध्यम से संकट का सामना कर रहे जहाजों को महत्वपूर्ण उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, और चिकित्सा सहायता तुरंत पहुँचाई जा सकेगी।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना की सफलता में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एनएसटीएल विशाखापत्तनम इस गतिविधि की नोडल प्रयोगशाला रही है। वहीं, एडीआरडीई, आगरा ने कंटेनर के लिए पैराशूट प्रणाली विकसित की। बेंगलुरुडीआरडीएल हैदराबाद ने परीक्षणों के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन सहायता प्रदान की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस कंटेनर की अधिकतम क्षमता क्या है?
इस कंटेनर की अधिकतम क्षमता 150 किलोग्राम है।
कहाँ पर परीक्षण किए गए?
इन परीक्षणों का आयोजन गोवा के तट पर किया गया।
कौन सी प्रयोगशालाएं इस परियोजना में शामिल थीं?
आगरा, बेंगलुरु, हैदराबाद और विशाखापत्तनम की सरकारी प्रयोगशालाएं इस परियोजना में शामिल थीं।
इस तकनीक से क्या लाभ होगा?
इस तकनीक से नौसेना के लिए आवश्यक वस्तुओं की समय पर आपूर्ति संभव होगी, विशेषकर जब वे समुद्र में दूर हों।
राष्ट्र प्रेस
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