क्या तमिलनाडु में अकेले कुछ कर सकती है भाजपा?: आनंद दुबे
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा के लिए तमिलनाडु में सफलता मुश्किल है।
- बालासाहेब ठाकरे की विरासत का महत्व है।
- कांग्रेस को अपने नेताओं का सम्मान करना चाहिए।
- बीएमसी चुनाव में भाजपा को सही रणनीति अपनानी होगी।
मुंबई, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भाजपा की तैयारी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वहाँ भाजपा अकेले किसी भी चीज़ में सफल नहीं हो सकती है।
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भाजपा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में प्रयास कर रही है, लेकिन वर्तमान में उनकी सफलता का कोई संकेत नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कभी महाराष्ट्र में भी ऐसे ही प्रयास किए थे, तब बालासाहेब ठाकरे ने उनकी सहायता की थी। भाजपा ने इसका बदला क्या लिया? बालासाहेब ठाकरे की पार्टी को तोड़ दिया। अकेले तमिलनाडु में भाजपा कुछ नहीं कर सकती है।
आनंद दुबे ने बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर कहा कि वे केवल महाराष्ट्र के नेता नहीं थे, बल्कि भारत के नेता थे। उन्होंने हिंदुओं के लिए जो आवाज उठाई, वह न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजती है। मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। हालांकि, जिन्हें उनकी पार्टी में पाला-पोसा गया और जो मजबूत हुए, उन्होंने अब इसे दो गुटों में बांट दिया है। आज नहीं तो कल चुनाव चिन्ह और पार्टी हम सुप्रीम कोर्ट से जरूर जीतेंगे।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर को लेकर उन्होंने कहा कि यहाँ कांग्रेस पार्टी का निजी मामला है, लेकिन शशि थरूर बहुत अच्छा काम करते हैं और उनसे काफी अनुभव है। अगर कांग्रेस पार्टी को लगता है कि अब उन्हें उनकी जरूरत नहीं है या उन्हें अब कांग्रेस की जरूरत नहीं है, तो यह उनका आंतरिक मामला है। बहुत सारी जगहों पर मनमुटाव होते हैं। अगर कांग्रेस अभी भी थरूर जैसे नेताओं का सम्मान नहीं करेगी, तो फिर किसका सम्मान करेगी? थरूर की नाराजगी को समझना चाहिए।
बीएमसी चुनाव संपन्न होने के बाद मेयर को लेकर चल रही खींचतान पर उन्होंने कहा कि भाजपा को बस अपना महापौर बनाना है, जो वे बहुत जल्दी बना देंगे, लेकिन इससे मराठी मानुष को क्या फायदा होगा? एकनाथ शिंदे को चिंतन करना चाहिए कि उन्होंने क्या खोया और क्या पाया।