4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या भाजपा खरीद-फरोख्त की राजनीति में लिप्त है, सत्ता ही एकमात्र लक्ष्य है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या भाजपा खरीद-फरोख्त की राजनीति में लिप्त है, सत्ता ही एकमात्र लक्ष्य है?

सारांश

नई दिल्ली में विपक्षी दलों ने संविधान संशोधन विधेयक पर केंद्र सरकार को घेर लिया है। यह विधेयक लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा है, और कांग्रेस से लेकर सपा तक, सभी दलों ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप लगाया है। जानें इस मुद्दे के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

संविधान के अनुच्छेद २५ और २६ सभी धर्मों को समान अधिकार प्रदान करते हैं।
लोकतंत्र को बनाए रखना आजादी के बाद का सबसे बड़ा फैसला है।
सरकार का नैतिक कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों को सुविधाएं प्रदान करे।
विपक्षी दलों की एकजुटता इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण है।
तानाशाही की ओर बढ़ने की आशंका चिंता का विषय है।

नई दिल्ली, २४ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। संविधान संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), और समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस विधेयक को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि पिछले १०-११ वर्षों में भाजपा ने कई राज्यों में सत्ता हासिल करने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए हैं।गुरदीप सिंह सप्पल ने महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय का उदाहरण देते हुए कहा, "कितने राज्यों में भाजपा ने विधायकों को खरीदा है? वे किसी भी तरह से सत्ता को हथियाना चाहते हैं। इसके लिए वे कॉन्स्टेबल तक को झूठे मामले बनाने और गिरफ्तारियां करने की जिम्मेदारी सौंपते हैं।"

वहीं, संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में शामिल होने से टीएमसी और सपा के इनकार पर सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि यह विधेयक लोकतंत्र को कमजोर करने वाला है। साथ ही यह बिल संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में लोगों की आवाज को दबाया गया है और देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। किसानों और गरीबों के अधिकार छीने जा रहे हैं, जिससे ऐसी आशंकाएं पैदा हो रही हैं।"

नदवी ने आगे कहा कि लोकतंत्र का मतलब २६ जनवरी १९५० को अपनाए गए संविधान को लागू करना है, जो सभी को समान अधिकार देता है।

उन्होंने कहा, "आजादी के बाद सबसे बड़ा फैसला लोकतंत्र को बनाए रखना था। संविधान के अनुच्छेद २५ और २६ के तहत सभी धर्मों और समुदायों को समान अधिकार मिले हैं, और इन्हें लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है।"

नदवी ने असम में चल रहे बेदखली अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का काम असहाय लोगों को बसाना और उनकी मदद करना है, न कि उन्हें उजाड़ना।

उन्होंने कहा, "चाहे लोग साठ-सत्तर साल से नागरिकता से वंचित हों या उनकी जमीन का दाखिल खारिज न हुआ हो, सरकार का नैतिक कर्तव्य है कि अपने नागरिकों को सुविधाएं प्रदान करे। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि विपक्षी दलों का आरोप भाजपा के खिलाफ गंभीर है। यदि लोकतंत्र को बनाए रखना है, तो सभी दलों को पारदर्शिता और नैतिकता का पालन करना होगा। इससे देश की राजनीति में स्थिरता आएगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संविधान संशोधन विधेयक का क्या महत्व है?
यह विधेयक लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप क्यों है?
विपक्षी दलों का कहना है कि भाजपा ने सत्ता में आने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए हैं।
लोकतंत्र को कमजोर करने वाले तत्व कौन से हैं?
उन तत्वों में विधायकों की खरीद-फरोख्त और असहमति की आवाज को दबाना शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले