क्या भाजपा ने 'नबीन युग' में नया मोड़ लिया? 45 साल की पार्टी और 45 वर्षीय अध्यक्ष
सारांश
Key Takeaways
- नितिन नबीन का युवा नेतृत्व भाजपा में नई ऊर्जा लाएगा।
- भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हुए हैं।
- नितिन नबीन ने बिहार में महत्वपूर्ण राजनीतिक यात्रा की है।
- संगठन के भीतर उनकी पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में है।
- उनका अनुभव भाजपा को भविष्य में नई दिशा दे सकता है।
नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी को एक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है। मंगलवार को नितिन नबीन औपचारिक रूप से पद की जिम्मेदारी ग्रहण करेंगे। नए अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेता, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और संगठन के महत्वपूर्ण लोग उपस्थित रहेंगे।
यह ध्यान देने योग्य है कि भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को एक 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है। यह संयोग भाजपा के इतिहास में पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की अपेक्षा की जा रही है। अब चलिए नितिन नबीन के राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं।
23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से की। बाद में उन्होंने दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की। बिहार की राजनीति में नितिन का नाम नया नहीं है। राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली हो, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान अपने दम पर बनाई। उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे। पिता के निधन के बाद, नितिन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और एक कुशल कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान बनाई।
पिता के निधन के बाद 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार विधानसभा में पहुंचे। परिसीमन के बाद, बांकीपुर सीट से उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने। बिहार विधानसभा में, उन्हें उन नेताओं में गिना जाता है जिनकी जीत की निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का आधार रही है।
बिहार की एनडीए सरकार में, नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल उन्हें पार्टी में अलग पहचान देता है। हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ समय बाद, उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
नितिन नबीन की असली ताकत संगठन में देखी गई। 2016 से 2019 तक बिहार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क बनाया। इसके बाद, वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने। संगठन में पहचान बनने के बाद, पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर जिम्मेदारियां सौंपी। सिक्किम में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के रूप में, उन्होंने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। उस समय जब भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था, भाजपा ने नबीन पर भरोसा जताया। संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का परिणाम यह रहा कि भाजपा ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की।
संगठन के भीतर, उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ जनों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पांच बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद का अनुभव नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाता है।