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क्या गोपाल राय ने केंद्र पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि 'देश का पैसा लेकर विदेश कैसे भाग जाते हैं लोग?'

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क्या गोपाल राय ने केंद्र पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि 'देश का पैसा लेकर विदेश कैसे भाग जाते हैं लोग?'

सारांश

गोपाल राय ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि कैसे लोग देश का पैसा लेकर विदेश फरार हो जाते हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल की तुलना करते हुए मौजूदा तानाशाही पर भी सवाल उठाए। क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा है? जानिए इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

गोपाल राय ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नेहल मोदी की गिरफ्तारी पीएनबी घोटाले से संबंधित है।
इंदिरा गांधी का आपातकाल आज की तानाशाही से तुलना की गई।
भाजपा की हार ने उनके भीतर की बौखलाहट को उजागर किया।
लोकतंत्र पर हमले की चिंता बढ़ रही है।

अहमदाबाद, ६ जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की सहायता एवं संयुक्त अपील के बाद, अमेरिका के न्याय विभाग ने पीएनबी घोटाले के एक और मुख्य आरोपी और भगोड़ा घोषित नीरव मोदी के छोटे भाई नेहल मोदी को अमेरिका में गिरफ्तार किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के नेता गोपाल राय ने सरकार पर सवाल उठाया कि देश के पैसे लेकर लोग कैसे विदेश भाग जाते हैं।

गोपाल राय ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि जिस तरह से बड़े पैमाने पर देश का पैसा लेकर लोग विदेश चले जाते हैं, वह बिल्कुल भी उचित नहीं है। एक किसान यदि कर्ज लेता है, तो उसकी संपत्ति कुर्क कर ली जाती है, लेकिन इतनी बड़ी रकम लेकर बड़े कारोबारी देश से भाग जाते हैं, जबकि सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती। सरकार को पहले ही इस पर ध्यान देना चाहिए था।

इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए गए आपातकाल पर राय का कहना था कि यह तानाशाही थी, जो थोड़े समय के लिए लागू की गई थी। आज की तानाशाही इससे भी अधिक खतरनाक है। आजकल स्थायी रूप से इमरजेंसी लागू है, लेकिन उसका रूप बदल गया है। इस समय आप कुछ भी कहने से डरते हैं, चारों ओर भय का माहौल है। हाल ही में, आप विधायक चैतर वसावा की गिरफ्तारी हुई है, क्योंकि उन्होंने गुजरात में मनरेगा घोटाले का खुलासा किया था। एक नई तरह की तानाशाही देश में उत्पन्न हो चुकी है, और इससे मुक्ति का रास्ता नए तरीके से निकाला जाएगा।

प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ७४ प्रतिशत लोग लोकतंत्र से संतुष्ट हैं। इस पर गोपाल राय ने बताया कि देश में संसदीय प्रणाली, न्यायपालिका, पत्रकारिता और व्यवस्थापिका पर हमले किए जा रहे हैं, ये चारों लोकतंत्र के स्तम्भ हैं। न्यायपालिका को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी का दुरुपयोग किया जा रहा है। इन सब कारणों से जनता में लोकतंत्र को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई है। हमें आशा है कि सरकार उठ रहे सवालों पर विचार करेगी और हमारी लोकतांत्रिक गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगी।

आप विधायक चैतर वसावा की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि विसावदर में भाजपा बुरी तरह से हारी थी और उसके बाद की बौखलाहट का पहला उदाहरण चैतर वसावा की गिरफ्तारी है। यह दिखाता है कि भाजपा विसावदर की हार के बाद कितनी बेचैन है। विसावदर का चुनाव केवल एक सीट का था, लेकिन इसके जीत के मायने बहुत बड़े हैं। इस सीट पर भाजपा का उम्मीदवार नहीं, बल्कि पूरी सत्ता लड़ रही थी। २९४ बूथों पर भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। इस दौरान शराब, पैसा और प्रशासन तक का इस्तेमाल किया गया था। विसावदर की जनता ने तीन गुना से अधिक वोट से भाजपा को पराजित कर दिया। अगर जनता एकजुट हो जाए, तो भाजपा के भय और भ्रष्टाचार के तंत्र को तोड़ा जा सकता है, और पूरे गुजरात में बदलाव लाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि गोपाल राय का बयान सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाता है। जब देश के पैसे का दुरुपयोग होता है, तो यह लोकतंत्र की मूल बातें कमजोर करता है। हमें इस पर चर्चा करने की आवश्यकता है कि कैसे हम ऐसे मामलों में सुधार कर सकते हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपाल राय ने किस मुद्दे पर सरकार को सवाल उठाया?
गोपाल राय ने देश के पैसे का दुरुपयोग करके विदेश भागने वाले लोगों पर सवाल उठाया है।
नेहल मोदी को क्यों गिरफ्तार किया गया?
नेहल मोदी को पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी होने के कारण अमेरिका में गिरफ्तार किया गया।
गोपाल राय का इंदिरा गांधी के आपातकाल पर क्या कहना था?
उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल को तानाशाही बताया और आज के दौर की तानाशाही को अधिक खतरनाक बताया।
विसावदर में भाजपा का क्या हाल है?
विसावदर में भाजपा को भारी हार का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी बौखलाहट बढ़ी है।
क्या लोकतंत्र को लेकर लोगों में चिंता है?
हां, प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, 74 प्रतिशत लोग लोकतंत्र से संतुष्ट नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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