क्या केंद्र सरकार टैरिफ का समाधान निकालेगी? : नरेंद्र कश्यप

सारांश
Key Takeaways
- भारत की अर्थव्यवस्था चौथे स्थान पर पहुंच गई है।
- नरेंद्र कश्यप ने टैरिफ पर प्रतिक्रिया दी।
- भाजपा ने राजनीतिक गठबंधनों में ईमानदारी दिखाई है।
- युवाओं की बेरोजगारी पर चिंता जताई गई।
- अमेरिकी टैरिफ से भारतीय आयात प्रभावित होगा।
लखनऊ, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ अब लागू हो चुके हैं। भारतीय आयातों पर 50 प्रतिशत टैरिफ भी लागू होगा। यूपी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था चौथे स्थान पर पहुंच गई है। पीएम इस चुनौती का समाधान जरूर निकालेंगे। यह सच है कि अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना उनका निर्णय हो सकता है, जो कुछ क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन, देशवासियों को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमेशा आश्वस्त और सुरक्षित महसूस होता है। पिछले 11 वर्षों में, उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, इसे वैश्विक स्तर पर 11वें स्थान से चौथे स्थान पर पहुंचाया है। यह इस बात का संकेत और प्रमाण है कि कोई भी क्षेत्र कमजोर नहीं होगा।
मंत्री नरेंद्र कश्यप ने यह भी कहा कि भाजपा ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर समर्पण और ईमानदारी से राजनीतिक गठबंधनों को बनाए रखा है। लोग इसे पहचानते हैं और उत्तर प्रदेश में संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर, जयंत चौधरी जैसे नेता राज्य के विकास के लिए एकजुट हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले 11 वर्षों में हर चुनाव में एनडीए गठबंधन की प्रचंड जीत हुई है। इंडिया गठबंधन भी इस बात को जानता है। उपराष्ट्रपति पद पर दोबारा एनडीए के उम्मीदवार जीतेंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अमेरिकी टैरिफ पर कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। जनता त्रस्त है और बहुत पीड़ित हैं।
अजय राय ने बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि युवा निराश हैं और सरकार तथाकथित ‘कुंभ रोजगार’ जैसे आयोजन करके छलावा कर रही है। वहां बच्चों और युवाओं के सीवी और डिग्रियां कूड़े में पड़ी मिल रही हैं। यह युवाओं के साथ घोर मजाक है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट बताती है कि 20-24 वर्ष के युवाओं में श्रम बल भागीदारी दर लगातार गिर रही है। इसका सीधा अर्थ है कि युवा रोजगार मांगना भी छोड़ चुके हैं।