क्या बिहार में एसआईआर के बाद ममता सरकार पुनः सत्ता में नहीं आएगी: राजीव रंजन प्रसाद?
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पटना, 26 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एसआईआर रैली पर सियासी हलचल तेज हो गई है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि एसआईआर के बाद ममता बनर्जी सत्ता में पुनः नहीं लौट पाएंगी।
राजीव रंजन प्रसाद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया, “बिहार में एसआईआर समय पर हुआ था और वहां चुनाव भी सहजता से संपन्न हुए थे। पश्चिम बंगाल में भी योग्य मतदाताओं को लिस्ट में शामिल किया जाना आवश्यक है तथा अपात्र मतदाताओं को हटाना चाहिए। यह प्रक्रिया शीघ्र पूरी होनी चाहिए। यह स्पष्ट है कि ममता बनर्जी पुनः सत्ता में नहीं आ सकेंगी।”
उन्होंने कहा कि एसआईआर के परिणामस्वरूप लोगों को लाभ ही होगा, किसी को हानि नहीं। एसआईआर के माध्यम से निष्पक्ष चुनाव आयोजित किया जाता है और सही लोग ही मतदान कर सरकार का चयन कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल में भी योग्य मतदाताओं को जोड़ने पर एनडीए की सरकार बनने की संभावना है। एसआईआर का एक ही लक्ष्य है कि निर्धारित समय सीमा में सही मतदाता सूची जारी की जाए।
आरजेडी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा किए गए एक पोस्ट पर राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “लोगों के दिलों में आरजेडी पहले ही समाप्त हो चुकी है। पार्टी चाहे जितनी बातें करे, चुनाव के दौरान जनता ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसलिए चुनाव में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा। लोगों को यह समझ में आ गया है कि आरजेडी के लोग केवल बातों की हवा में हैं।”
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा था, "सुशासन बाबू का विकास मॉडल। करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव का अपमान करना उनकी प्राथमिकता है। घर से तो निकाल देंगे, लेकिन बिहार की जनता के दिल से कैसे निकालेंगे।"
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री सीएम राबड़ी देवी और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने पर, राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “यह एक निर्धारित प्रक्रिया है। केंद्र सरकार समय-समय पर पद के अनुसार आवास देती है। राबड़ी देवी को नए घर की मंजूरी मिल गई है। तेज प्रताप किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें घर खाली करना होगा। इस पर सियासत नहीं करनी चाहिए।”
वहीं, पूर्व सीएम राबड़ी देवी और तेज प्रताप को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने पर बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन ने कहा, “यह एक सरकारी प्रक्रिया है। एमएलए को उनकी श्रेणी के अनुसार घर दिया जाता है। यहां ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिस पर मुझे जवाब देने की आवश्यकता हो।”