क्या एमसीडी का बजट जनता से कटा और सिर्फ कागजों तक सीमित है?
सारांश
Key Takeaways
- बजट में जनहित की अनदेखी।
- सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति।
- कर्मचारियों के हित को नजरअंदाज किया गया।
- दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाएं की दुर्दशा।
- आवारा पशुओं और पक्षियों का मुद्दा।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के सिविक सेंटर में आयोजित स्थायी समिति की बैठक में वर्ष 2026-27 के संभावित बजट पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्यों ने भाजपा द्वारा संचालित एमसीडी के बजट का कड़ा विरोध किया।
नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने बजट को जनहित से दूर बताते हुए इसे ‘صرف एक कागजी दस्तावेज’ कहा। उन्होंने कहा कि यह बजट न केवल दिल्ली की जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ है, बल्कि एमसीडी के कर्मचारियों के लाभ के लिए भी कोई ठोस संकेत नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट को केवल आंकड़ों का खेल नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य दिल्लीवासियों को स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर जीवन प्रदान करना होना चाहिए, लेकिन यह बजट इन मूलभूत उद्देश्यों में पूरी तरह असफल है।
बैठक के दौरान, आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने दिल्ली की खराब सफाई व्यवस्था, बढ़ते प्रदूषण, एमसीडी स्कूलों की दयनीय स्थिति और नगर निगम के अधीन स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। इसके बावजूद, बजट में इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की तथाकथित ‘चार इंजन की सरकार’ है, लेकिन फिर भी एमसीडी को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि केंद्र, राज्य और निगम में भाजपा की सरकार है, तो एमसीडी के कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए संसाधनों की कमी क्यों है। उन्होंने कहा कि एमसीडी कमिश्नर द्वारा प्रस्तुत बजट में कहीं भी यह संकेत नहीं मिलता कि निगम की कार्यप्रणाली में कोई ठोस सुधार होने वाला है।
अंकुश नारंग ने यह भी कहा कि स्वच्छता, पार्कों का रखरखाव, नए पेड़ लगाने, और आवारा पशुओं तथा पक्षियों की समस्या जैसे मूलभूत मुद्दों को बजट में प्राथमिकता देनी चाहिए थी, लेकिन ये सभी मुद्दे पूरी तरह से गायब हैं। न तो पार्षदों के बजट में कोई वृद्धि की गई है और न ही जनता से जुड़े कार्यों के लिए कोई विशेष प्रावधान किया गया है।
उन्होंने एमसीडी कर्मचारियों की स्थिति पर बोलते हुए कहा कि निगम की रीढ़ समझे जाने वाले कर्मचारियों के लिए बजट में कोई ठोस योजना नहीं है। सफाई कर्मचारियों को 5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव तो है, लेकिन उनकी चिकित्सा सुविधा, स्थायीकरण, सेवानिवृत्ति लाभ और वेतन वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी साध ली गई है। इसी तरह एमटीएस कर्मचारियों को स्थायी करने और समान वेतन देने पर भी कोई चर्चा नहीं हुई है।
अंकुश नारंग ने कहा कि पिछले एक वर्ष में एमसीडी कर्मचारी कई बार हड़ताल पर गए, फिर भी बजट में उनके हितों को नजरअंदाज किया गया। अंततः, उन्होंने कहा कि भाजपा के 15 वर्षों के निगम शासन में कई सुझाव आए, लेकिन वे कभी लागू नहीं हुए। यह बजट भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें कथनी और करनी के बीच जमीन-आसमान का अंतर स्पष्ट है।