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क्या राहुल गांधी को राम मंदिर जाने के लिए परिश्रम करना होगा?

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क्या राहुल गांधी को राम मंदिर जाने के लिए परिश्रम करना होगा?

सारांश

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने की चर्चाएं तेजी से चल रही हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि उन्हें इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी, क्योंकि उनमें भगवान राम के प्रति आस्था नहीं है। क्या यह उनकी राजनीतिक यात्रा का एक नया मोड़ बनेगी?

मुख्य बातें

राहुल गांधी के राम मंदिर जाने की चर्चाएँ बढ़ी हैं।
भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्हें परिश्रम करना होगा।
आस्था का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के अयोध्या स्थित राम मंदिर जाने की चर्चाओं पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कहा है कि उन्हें राम मंदिर जाने के लिए बहुत परिश्रम करना होगा, क्योंकि उनके अंदर भगवान राम के प्रति आस्था नहीं है।

बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने राहुल गांधी के बारे में कहा, "भगवान राम पहचानते हैं कि कौन भक्त असली है और कौन-सा भक्त नकली है। नकली भक्त राजनीतिक दुकानदारी के लिए मंदिर में जाकर मत्था टेकते हैं।"

भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "राहुल गांधी जर्मनी और अमेरिका समेत विदेश के अन्य देशों की यात्राओं से वापस आ जाएं, तब कहीं उन्हें राम मंदिर जाने का समय मिलेगा। लेकिन इसमें भी काफी देरी हो चुकी है। प्राण प्रतिष्ठा के दो साल बाद भी राहुल गांधी को अयोध्या जाने का समय नहीं मिला है, तो इससे न उनकी आस्था जगजाहिर होगी और न जनता के बीच कोई संदेश जाएगा।"

उन्होंने आगे कहा, "राहुल गांधी को अयोध्या राम मंदिर जाने के लिए बहुत परिश्रम करना होगा, क्योंकि उनके अंदर भगवान राम को लेकर आस्था नहीं है। वह जाएंगे तो सिर्फ फोटोबाजी होगी। इससे अच्छा होगा कि राहुल गांधी को वियतनाम और अन्य देशों की यात्रा पर ही फोकस करना चाहिए, जहां वे लगातार भारत को बदनाम करते हैं।"

भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने भी राहुल गांधी के अयोध्या जाने की चर्चा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी को सबसे पहले राम मंदिर की सीढ़ियों के पास बैठकर प्रायश्चित करना चाहिए। वे अगर राम मंदिर जाते हैं तो उन्हें वहां सबसे पहले मंदिर की सीढ़ियों पर मत्था टेककर माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि कांग्रेस की सरकार ने ही भगवान राम को काल्पनिक बताया था।"

इसी बीच, भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के एमएलसी बोम्मा महेश कुमार गौड़ की 'भगवान राम' पर टिप्पणी को लेकर करारा जवाब दिया। दिलीप जायसवाल ने कहा, "धर्म-आस्था से खिलवाड़ करने वालों को समाज कभी स्वीकार नहीं करती है। भगवान राम दिल में बसते हैं, उन्हें कागजों पर सदस्य बनने की जरूरत नहीं है। भारतीय जनता पार्टी सनातन विचारधारा की पार्टी है। हम अपने आराध्य भगवान राम के आदर्शों पर चलते हैं। इसलिए विपक्ष के नेताओं को पता नहीं है कि धर्म-आस्था के साथ खिलवाड़ को जनता पसंद नहीं करती है।"

तुहिन सिन्हा ने कहा, "सनातन विरोध और सनातन का अपमान मौजूदा कांग्रेस पार्टी के लिए एक नशा बन चुका है। किसी न किसी तरीके से हर दिन कांग्रेस का कोई न कोई नेता सनातन के खिलाफ बयान देता है। मणिशंकर अय्यर ने दो दिन पहले हिंदू धर्म को अपमानित करने का काम किया। इसी तरह सोमवार को तेलंगाना के नेता ने बयान दिया है। हिंदू धर्म पर सवाल उठाना कांग्रेस पार्टी की फितरत है और यह जवाहरलाल नेहरू के समय से चली आ रही है। लेकिन राहुल गांधी के समय में यह अपने चरम पर है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें आस्था और विश्वास का संतुलन आवश्यक है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी का राम मंदिर जाना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह उनके राजनीतिक छवि को प्रभावित कर सकता है और जनता के बीच उनकी आस्था को भी दर्शाता है।
भाजपा नेता राहुल गांधी के बारे में क्या कहते हैं?
भाजपा नेता मानते हैं कि राहुल गांधी को राम मंदिर जाने के लिए बहुत परिश्रम करना होगा, क्योंकि उनमें भगवान राम के प्रति आस्था नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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