ईडी की बड़ी कार्रवाई: ₹7.76 करोड़ की संपत्ति अटैच, रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज पर यूको बैंक से ₹58 करोड़ धोखाधड़ी का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- ईडी, इंदौर ने 28 अप्रैल को पीएमएलए 2002 के तहत ₹7.76 करोड़ की अचल संपत्ति अटैच की।
- मामला रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब स्टीलटेक रिसोर्सेज़ लिमिटेड) से जुड़ा है।
- कंपनी पर यूको बैंक, इंदौर के साथ ₹58 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है।
- इससे पहले भी इस मामले में ₹10.15 करोड़ की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
- कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर क्रेडिट सुविधाएं हासिल कर 'लेयरिंग' के जरिए धन को छुपाया।
- ईडी के अनुसार जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में 28 अप्रैल को अहम कार्रवाई करते हुए ₹7.76 करोड़ की अचल संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई इंदौर स्थित ईडी के सब-जोनल कार्यालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है और यह मामला रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब स्टीलटेक रिसोर्सेज़ लिमिटेड) से जुड़ा हुआ है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भोपाल एसीबी शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। इस एफआईआर में कंपनी पर यूको बैंक, इंदौर के साथ ₹58 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। जांच में सामने आया कि कंपनी ने फर्जी और हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंक से क्रेडिट सुविधाएं और लेटर ऑफ क्रेडिट हासिल किए, जबकि वास्तव में कोई वास्तविक व्यापार नहीं था।
फंड की लेयरिंग और संपत्ति खरीद
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने अपने ग्रुप और सहयोगी कंपनियों में निवेश तथा लोन के जरिए फंड का दुरुपयोग किया और उसे विभिन्न खातों में घुमाया। ईडी ने पाया कि इस पैसे को जटिल 'लेयरिंग' प्रक्रिया के जरिए कई कंपनियों से होकर वापस उसी कंपनी तक पहुंचाया गया। इसके बाद इसी अवैध धन से अलग-अलग संपत्तियां खरीदी गईं, जो अब जमीन के रूप में कंपनी के नाम पर दर्ज हैं।
अब तक की कुल कार्रवाई
गौरतलब है कि इस मामले में यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी ईडी, इंदौर इस मामले में ₹10.15 करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुका है। इस प्रकार अब तक इस मामले में कुल अटैच की गई संपत्तियों की संख्या उल्लेखनीय है और जांच के दायरे का विस्तार हो रहा है।
आगे की जांच
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे संभव हैं। यह मामला देश में बैंकिंग धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामलों की पृष्ठभूमि में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जहाँ जांच एजेंसियां अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अटैच करने में तेजी ला रही हैं।