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क्या ईडी ने एरा इंफ्रा धोखाधड़ी मामले में 55.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां बहाल की?

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क्या ईडी ने एरा इंफ्रा धोखाधड़ी मामले में 55.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां बहाल की?

सारांश

एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड के मामले में ईडी ने 55.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां बहाल की हैं। यह कदम सही हकदारों को उनकी धनराशि वापस लौटाने के लिए उठाया गया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और ईडी की कार्यवाही के पीछे की वजह।

मुख्य बातें

ईडी ने 55.85 करोड़ रुपए की संपत्तियां वापस लौटाई।
कंपनी ने यूको बैंक से 650 करोड़ रुपए का लोन लिया था।
कंपनी की संपत्तियों को 2019-2020 में कुर्क किया गया।
कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई है।
ईडी धन शोधन के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

नई दिल्ली, 11 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड से संबंधित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ईडी ने शुक्रवार को इस मामले में अपराध की आय (पीओसी) को वास्तविक हकदारों के पास लौटाने की प्रक्रिया के तहत 55.85 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियों को बहाल कर दिया।

ईडी ने यह जांच 12 अप्रैल 2018 को सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह मामला एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड, हेम सिंह भराना और अन्य के खिलाफ कई धाराओं में दर्ज किया गया था। ईडी ने 250.70 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी के आरोप में जांच शुरू की थी।

एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड एक निर्माण कंपनी है, जो एयरपोर्ट्स, पावर प्रोजेक्ट्स, संस्थागत भवनों, औद्योगिक परिसरों, मॉल्स और आवासीय परियोजनाओं जैसे बुनियादी ढांचे से संबंधित कार्य करती है।

कंपनी ने यूको बैंक से 650 करोड़ रुपए का लोन लिया था, लेकिन जांच में यह सामने आया कि कंपनी ने इस लोन का एक बड़ा हिस्सा अपनी समूह कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। इस राशि का उपयोग उन कार्यों में किया गया, जो लोन एग्रीमेंट में शामिल नहीं थे। इसके परिणामस्वरूप इसे 7 जुलाई 2013 को एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) घोषित किया गया।

मामले में ईडी ने 7 अक्टूबर 2019, 8 जुलाई 2020 और 5 अगस्त 2020 को तीन अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए, जिनमें कंपनी की दो टनल बोरिंग मशीनें और बैंक खाते की शेष राशि के अलावा अन्य चल और अचल संपत्तियां भी कुर्क की गईं। इसके बाद ईडी ने 12 मार्च 2021 को विशेष अदालत में एक शिकायत दायर की और इन संपत्तियों को जब्त करने की मांग की।

बाद में कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई और एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने रेजोल्यूशन एप्लीकेंट घोषित किया। एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड के नए प्रबंधन ने दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में एक आवेदन दिया, जिसमें कुर्क की गई संपत्तियों की बहाली की मांग की गई थी।

आवेदन पर विचार करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने कुर्क की गई संपत्तियों (कंपनी की दो टनल बोरिंग मशीनें और बैंक खाते में शेष राशि) को एरा इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड के नए प्रबंधन को वापस करने पर सहमति दी। इसके बाद स्पेशल कोर्ट ने संपत्तियों को बहाल करने का आदेश दिया, जिसकी कुल कीमत 55.85 करोड़ रुपए आंकी गई।

यह धनराशि, जो गलत तरीके से इस्तेमाल की गई थी, को सही दावेदारों को वापस दिलाने के प्रवर्तन निदेशालय के अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रवर्तन निदेशालय धन शोधन से निपटने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि अपराध की आय उसके सही मालिकों को वापस मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह न केवल धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई का प्रतीक है बल्कि यह दिखाता है कि सरकार धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ कितनी गंभीर है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने एरा इंफ्रा के खिलाफ जांच कब शुरू की थी?
ईडी ने 12 अप्रैल 2018 को सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।
कंपनी ने यूको बैंक से कितना लोन लिया था?
कंपनी ने यूको बैंक से 650 करोड़ रुपए का लोन लिया था।
कंपनी की संपत्तियों को कब और क्यों कुर्क किया गया था?
कंपनी की संपत्तियों को 2019 से 2020 के बीच कुर्क किया गया था, क्योंकि ईडी ने बैंक धोखाधड़ी के आरोपों के तहत जांच शुरू की थी।
दिवालिया प्रक्रिया में कंपनी का क्या हुआ?
कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई और एसए इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को रेजोल्यूशन एप्लीकेंट घोषित किया गया।
ईडी का क्या उद्देश्य है?
ईडी का उद्देश्य धन शोधन से निपटना और अपराध की आय को सही मालिकों को वापस लौटाना है।
राष्ट्र प्रेस
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