क्या राहुल गांधी राजनीतिक रूप से गरीब और बेरोजगार हैं? दिनेश प्रताप सिंह के बयान पर चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी के राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
- भाजपा सांसद दिनेश प्रताप सिंह ने उनके खिलाफ तीखे बयान दिए हैं।
- मनरेगा का नाम बदलने का उद्देश्य नई दिशा में योजना को ले जाना है।
- मोदी सरकार के कार्यकाल में गांवों की स्थिति में सुधार का दावा किया गया है।
- राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भारतीय राजनीति में सामान्य हैं।
हरदोई, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस ने मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत-जी राम जी' करने के बाद 'मनरेगा बचाओ अभियान' शुरू किया है। इस बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह गरीबों और श्रमिकों का स्वाभिमान है। भाजपा सांसद और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने मंगलवार को राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से गरीब और बेरोजगार कहा।
दिनेश प्रताप सिंह ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "जो लोग चांदी की थाली में सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं, वे गरीबों की स्थिति को कैसे समझ सकते हैं? यह दुखद है कि ऐसे लोग जिनकी पीढ़ियों ने गरीबी हटाने का नारा दिया, वे आज भी गरीबी की बात करते हैं। असली गरीबी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में खत्म हुई है। मुझे गर्व है कि पीएम मोदी के कार्यकाल में गांवों में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता है। सभी भारतीय संस्कृति के अनुसार खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, "हमारी सरकार ने इस योजना के तहत गरीबों के हित में कई अवसर दिए हैं। जो कार्य पहले मनरेगा के तहत होते थे, अगर वे खत्म हो गए हैं तो आगे क्या किया जाएगा? ग्राम सभाओं को समृद्ध बनाकर ग्रामीणों की आशाओं के अनुरूप हम कार्य करेंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करेंगे, जो पहले मनरेगा में नहीं होता था।"
भाजपा सांसद ने कहा, "पहले यह प्रक्रिया नहीं थी कि जरूरत पड़ने पर छोटे उद्योग लगाकर गरीबों को रोजगार मिले। हमें ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है जो केवल एक नहीं, बल्कि कई पंचवर्षीय योजनाओं तक आय का साधन बन सके। ग्राम सभाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और अपने विकास में सहायक होंगी। अगर पीएम मोदी ऐसा प्रयास कर रहे हैं, तो इससे किसी गरीब को नुकसान नहीं हो रहा है।"
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा, "अगर इस योजना से किसी को नुकसान हो रहा है, तो वह केवल राहुल गांधी हैं। बाकी सभी मोदी के नेतृत्व में समृद्ध हो रहे हैं। देश में केवल एक ही गरीब बचा है, जो राजनीतिक गरीबी का शिकार है। राहुल गांधी अपने आचरण के कारण राजनीतिक गरीब और बेरोजगार हैं। भारत की जनता उन्हें रोजगार नहीं देना चाहती।"