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क्या सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म देश को जोड़ते हैं? : अबू आजमी

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क्या सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म देश को जोड़ते हैं? : अबू आजमी

सारांश

अबू आजमी का मानना है कि सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म देश को एकजुट करते हैं। यह बयान तब आया है जब आरएसएस महासचिव ने संविधान में इन शब्दों की समीक्षा की मांग की। आजमी के अनुसार यह संविधान की मूलभूत संरचना का हिस्सा हैं, जिसे नहीं हटाया जा सकता।

मुख्य बातें

सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म देश को जोड़ते हैं।
संविधान की मूल संरचना को सुरक्षित रखना आवश्यक है।
धर्मनिरपेक्षता सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करती है।
राजनीति को धर्म से अलग रखना चाहिए।
संविधान में बदलाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

मुंबई, 27 जून (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी का मानना है कि सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म देश को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण तत्व हैं। अबू आजमी का यह बयान उस समय आया है जब आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों की समीक्षा की मांग की है।

शुक्रवार को, आजमी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि जो लोग इस देश को एक ही रंग में रंगना चाहते हैं, वे संविधान को नहीं बदल सकते। वे संविधान की मज़बूत दीवारों को तोड़कर उसे कमजोर करना चाहते हैं। धर्मनिरपेक्षता संविधान का एक मजबूत हिस्सा है। आज कई अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जेल में हैं और उन्हें जमानत नहीं मिल रही है।

सपा नेता ने धर्म के आधार पर देश में हो रही राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग धर्म के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं। उन्हें हिंदू राष्ट्र बनाने में सोशलिज्म और धर्मनिरपेक्षता से परेशानी हो रही है। यदि वे इसे हटा देंगे तो देश टूट जाएगा। यह शब्द सभी को एक साथ जोड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि संविधान में सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म एक मुख्य तत्व हैं और इन्हें हटाया नहीं जा सकता।

अबू आजमी ने दावा किया है कि इस तरह की मांगों से स्पष्ट होता है कि कुछ लोग चाहते हैं कि देश में केवल एक ही कौम का राज हो, जबकि अन्य को दरकिनार किया जाए। ये लोग संविधान की मज़बूत दीवार को तोड़कर हिन्दुत्व लाना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मैं देश से कहना चाहता हूं कि यदि धर्मनिरपेक्षता का शब्द हट जाएगा, तो संविधान की दीवार टूट जाएगी और देश में कोहराम मच जाएगा। देश को जोड़ने की कोशिश होनी चाहिए, तोड़ने की नहीं। ऐसी चीजों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जिससे देश का भविष्य शानदार हो। सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म देश को जोड़ते हैं। जो भी लोग देश के संविधान को मानते हैं, उन्हें भी इसका विरोध करना चाहिए।

राष्ट्र प्रेस
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