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क्या यूपीए सरकार में संविधान संशोधन जनता के हित में होते थे? : शिल्पी नेहा तिर्की

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क्या यूपीए सरकार में संविधान संशोधन जनता के हित में होते थे? : शिल्पी नेहा तिर्की

सारांश

क्या यूपीए सरकार के दौरान संविधान संशोधन जनता के हित में होते थे? झारखंड की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने वर्तमान विधेयक को राजनीतिक स्वार्थ का उदाहरण बताया है। जानिए उनके विचारों और इस विधेयक के संभावित प्रभावों के बारे में।

मुख्य बातें

यूपीए सरकार के संविधान संशोधन जनता के हित में थे।
वर्तमान विधेयक राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थों के लिए है।
यह विधेयक लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी।
विधेयक का प्रभाव २०२९ के लोकसभा चुनाव में देखा जाएगा।

रांची, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने यह दावा किया है कि यूपीए सरकार के समय में संविधान संशोधन हमेशा जनता के हित में किए जाते थे, जबकि वर्तमान में लाए गए विधेयक का उद्देश्य राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थों को साधना है। यह विधेयक, जो गंभीर आपराधिक मामलों में ३० दिनों से अधिक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान करता है, इसे लोकतंत्र के खिलाफ और सत्ता के दुरुपयोग का एक साधन माना जा रहा है।

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने हेमंत सोरेन को चुना है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को बिना किसी कारण के जेल में डालना गलत है। केंद्रीय गृह मंत्री के सुझाव पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि किसी मामले में आरोपित हैं तो उसे ३० दिन के भीतर पद छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने तर्क किया कि यह निर्णय जनता का है, न कि केंद्र सरकार या केंद्रीय गृह मंत्री का। उन्होंने कहा, "आप कौन होते हैं, यह निर्णय करने वाले? जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है।"

तिर्की ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संविधान में अपने अनुसार संशोधन कर रही है, जो देश के इतिहास में पहली बार हो रहा है। पहले यूपीए सरकार के दौरान संशोधन जनता के हित में होते थे, लेकिन अब एनडीए सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए संशोधन कर रही है। उन्होंने इसे तानाशाही करार देते हुए कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और अन्य सहयोगी दल इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।

इसी बीच, मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि इस विधेयक के जरिए भाजपा जनता का अपमान कर रही है और निर्वाचित राजनेताओं का मनोबल तोड़ने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने इसे शर्मनाक और मजाक करार देते हुए कहा कि देश को इस कदम से शर्मिंदा होना पड़ा।

अंसारी ने तंज करते हुए कहा कि यदि भाजपा इतनी साहसी है, तो उसे न्यायपालिका और कार्यपालिका को नियंत्रित करने वाला विधेयक लाना चाहिए। जनता वोट देकर नेताओं को चुनती है, और वे जनता के लिए कार्य करते हैं। लोग इस विधेयक को लेकर भाजपा पर हंस रहे हैं, और पार्टी को अपनी छवि सुधारने और संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि लोग उनकी खिल्ली न उड़ाएं।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि चाहे सरकार जेल से चले या न चले, यदि यह विधेयक राजनीति से प्रेरित प्रतिशोध या निजी हितों की भावना से लाया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून का उपयोग पार्टी हितों के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए होना चाहिए। एनडीए के पास बहुमत होने के कारण वे इस विधेयक को संसद में पास करा सकते हैं, लेकिन इसका असली प्रभाव २०२९ के लोकसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि संविधान में संशोधन का उद्देश्य हमेशा लोकतंत्र की रक्षा होनी चाहिए। किसी भी विधेयक का राजनीतिक स्वार्थ के लिए उपयोग करना न केवल लोकतंत्र का अपमान है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यूपीए सरकार के संविधान संशोधन जनता के हित में थे?
जी हां, शिल्पी नेहा तिर्की का कहना है कि यूपीए सरकार के दौरान किए गए संशोधन हमेशा जनता के हित में थे।
वर्तमान विधेयक का उद्देश्य क्या है?
वर्तमान विधेयक का उद्देश्य राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थों को साधना है, जैसा कि तिर्की ने आरोप लगाया है।
क्या विधेयक लोकतंत्र के लिए खतरनाक है?
हां, कई नेताओं का मानना है कि यह विधेयक लोकतंत्र के लिए खतरा है और सत्ता के दुरुपयोग का उपकरण बन सकता है।
क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी?
जी हां, तिर्की ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और अन्य सहयोगी दल इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
इस विधेयक का प्रभाव कब दिखेगा?
इसका असली प्रभाव २०२९ के लोकसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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