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क्या तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने लखपत गुरुद्वारा को पुनर्स्थापित किया था? आज यह ग्लोबल हेरिटेज में है!

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क्या तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने लखपत गुरुद्वारा को पुनर्स्थापित किया था? आज यह ग्लोबल हेरिटेज में है!

सारांश

गुजरात का लखपत गुरुद्वारा, जो एक विनाशकारी भूकंप से तबाह हो गया था, को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्स्थापित किया। आज यह स्थान वैश्विक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है। जानिए इसके इतिहास और महत्व के बारे में।

मुख्य बातें

लखपत गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी का ऐतिहासिक स्थल है।
यह गुरुद्वारा २००१ में भूकंप से तबाह हो गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे पुनर्स्थापित किया है।
यह आज ग्लोबल हेरिटेज में गिना जाता है।
इसका पुनर्निर्माण यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है।

नई दिल्ली, ५ नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। श्री गुरु नानक देव जी से जुड़े स्थलों में गुजरात का लखपत भी शामिल है। एक समय में, एक विनाशकारी भूकंप ने लखपत स्थित गुरुद्वारे को खंडहर में बदल दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गुरुद्वारे को उसके गौरव के साथ पुनर्स्थापित किया और आज यह ग्लोबल हेरिटेज में गिना जाता है।

प्रकाश पर्व के अवसर पर 'मोदी आर्काइव' में लखपत के गुरुद्वारे के बारे में जानकारी दी गई है।

लखपत, कच्छ के सुदूर उत्तर-पश्चिमी कोने में, विशाल रण के उत्तर की ओर स्थित है। यह कभी एक प्रमुख बंदरगाह शहर था और अपने धार्मिक इतिहास के लिए भी महत्वपूर्ण है। २०१४ में, प्रधानमंत्री की शपथ लेने से पहले, नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी अपनी यात्राओं के दौरान यहीं रुके थे। बाद में, यह स्थल एक गुरुद्वारे में परिवर्तित हो गया, जहां श्री गुरु नानक देव जी की संपत्तियां रखी गईं।

उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि लखपत के गुरुद्वारे में आज भी श्री गुरु नानक देव जी की पादुकाएं सुरक्षित हैं। गुरु नानक देव जी गुजरात आए थे और यह स्थान उनकी स्मृतियों से जुड़ा हुआ है। वे सिंध जाने से पहले लंबे समय तक लखपत में रुके थे।"

'मोदी आर्काइव' में बताया गया है कि २००१ में एक विनाशकारी भूकंप ने लखपत गुरुद्वारे को मलबे में बदल दिया था। उस समय, नरेंद्र मोदी कच्छ में एक स्वयंसेवक थे और इस विनाश से बहुत दुखी थे।

उन्होंने कहा, "भूकंप में यह गुरुद्वारा नष्ट हो गया। जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में वहां गया, तो मैंने सबसे पहले कच्छ के भूकंप पीड़ितों की सहायता का कार्य शुरू किया। मैंने लखपत में गुरुद्वारे की दुर्दशा देखी, जो भूकंप के कारण टूट चुका था। हमने इस विषय के विशेषज्ञों को बुलाया और ठान लिया कि यह पूरी मानवता की अनमोल विरासत है। यह सिर्फ एक गुरुद्वारा नहीं है, बल्कि गुरु नानक देव जी की स्मृतियों से जुड़ा है।"

कुछ महीनों बाद मुख्यमंत्री बनने के बाद, नरेंद्र मोदी ने लखपत गुरुद्वारा साहिब को उसके मूल गौरव के साथ पुनर्स्थापित किया।

अपने संकल्प की बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम वैसा ही गुरुद्वारा बनाएंगे, जैसा पहले था, उसी आर्किटेक्चर के साथ। इसके लिए हमने गुजरात के बाहर से विशेषज्ञों को बुलाया और उसे फिर से बनाया। आज इसे दुनिया की विरासत में स्थान मिला है।"

पुनर्निर्मित लखपत गुरुद्वारा साहिब को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उत्कृष्टता के लिए २००४ में यूनेस्को एशिया-प्रशांत विरासत संरक्षण पुरस्कार मिला। यह जीर्णोद्धार श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के प्रति एक श्रद्धांजलि है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि लखपत गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के प्रयासों का भी प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी विरासत को बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखपत गुरुद्वारा क्यों महत्वपूर्ण है?
लखपत गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यह सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लखपत गुरुद्वारे को कब पुनर्स्थापित किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने लखपत गुरुद्वारे को २०१४ में पुनर्स्थापित किया था।
लखपत गुरुद्वारे को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है?
लखपत गुरुद्वारे को २००४ में यूनेस्को एशिया-प्रशांत विरासत संरक्षण पुरस्कार मिला।
राष्ट्र प्रेस
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