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पुंछ के मेंढर सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट, दो सैनिक घायल; कांगा गली में हादसा

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पुंछ के मेंढर सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट, दो सैनिक घायल; कांगा गली में हादसा

सारांश

पुंछ के मेंढर सेक्टर में बुधवार रात लैंडमाइन निष्क्रिय करने की कोशिश में विस्फोट हुआ और दो सैनिक घायल हो गए। मानसून में बाढ़ व भूकटाव से खिसकी 'ड्रिफ्ट लैंडमाइन' एलओसी के पास बड़ा खतरा बनी हुई हैं।

मुख्य बातें

पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर की कांगा गली में बुधवार रात लैंडमाइन विस्फोट में दो सैनिक घायल हुए।
सेना की पेट्रोलिंग पार्टी ने खदान की पहचान की; विशेषज्ञ दस्ते द्वारा निष्क्रियीकरण के प्रयास के दौरान विस्फोट हुआ।
घायल सैनिकों को तत्काल आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
मानसून में बाढ़ व मिट्टी कटाव से ड्रिफ्ट लैंडमाइन सुरक्षित घोषित रास्तों पर आ जाती हैं — बारामूला, पुंछ और राजौरी सर्वाधिक प्रभावित।
नलवा देगवार टेरवान में सड़क निर्माण मजदूरों को मिला जंग लगा हैंड ग्रेनेड बम निरोधक दस्ते ने सुरक्षित नष्ट किया।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर स्थित कांगा गली में बुधवार रात एक लैंडमाइन को निष्क्रिय करने के प्रयास के दौरान विस्फोट हो गया, जिसमें दो सैनिक घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, सेना की पेट्रोलिंग पार्टी को क्षेत्र में लैंडमाइन का पता चला, जिसके बाद विस्फोटक निरोधक विशेषज्ञों को बुलाया गया, परंतु निष्क्रियीकरण की प्रक्रिया के दौरान वह फट गई।

घटनाक्रम और तत्काल प्रतिक्रिया

अधिकारियों ने बताया कि घायल सैनिकों को तत्काल आर्मी हॉस्पिटल पहुँचाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। पेट्रोलिंग दल ने लैंडमाइन की पहचान करने के बाद मानक प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञ दस्ते को सूचित किया था। फिलहाल दोनों सैनिकों की स्थिति के बारे में आधिकारिक विवरण प्रतीक्षित है।

ड्रिफ्ट लैंडमाइन: एलओसी पर बड़ा खतरा

घुसपैठ-रोधी ग्रिड के तहत लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के निकटवर्ती क्षेत्रों में एंटी-पर्सनल लैंडमाइन बिछाई जाती हैं। तकनीकी भाषा में इन्हें 'ड्रिफ्ट लैंडमाइन' कहा जाता है। भारी वर्षा, अचानक आई बाढ़ और मिट्टी के कटाव के कारण ये खदानें अपनी मूल स्थिति से खिसककर उन रास्तों पर आ जाती हैं जिन्हें पहले सुरक्षित घोषित किया जा चुका होता है।

पहाड़ी ढलानों से नीचे बहकर आए जंग लगे विस्फोटक नदी-मार्गों और गश्ती पथों पर पहुँच जाते हैं, जिससे पहले से मैप की गई माइनफील्ड्स की सुरक्षा-परिधि व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो जाती है। यह स्थिति पेट्रोलिंग सैनिकों, सीमावर्ती ग्रामीणों और मवेशियों के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करती है।

संवेदनशील जिले और पूर्व की घटनाएँ

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारामूला, पुंछ और राजौरी जिले विशेष रूप से इस खतरे की चपेट में हैं। इन क्षेत्रों में 'नो मैन्स लैंड' के रूप में चिह्नित स्थानों पर घुसपैठ-रोधी ग्रिड के अंतर्गत बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं। इन्हीं इलाकों में पहले भी खिसकती बारूदी सुरंगों के कारण दुर्घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं।

नलवा देगवार टेरवान में अतिरिक्त विस्फोटक मिला

इसी बीच, नलवा देगवार टेरवान क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को एक जंग लगा हुआ अविस्फोटित विस्फोटक उपकरण मिला, जिसके बारे में अधिकारियों का अनुमान है कि यह एक हैंड ग्रेनेड था। सेना के बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुँचकर उसे सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया।

आगे की स्थिति

मानसून के दौरान इस प्रकार की घटनाओं में वृद्धि देखी जाती है, क्योंकि बादल फटने और भूस्खलन से ड्रिफ्ट लैंडमाइन का खतरा बढ़ जाता है। सेना के अधिकारियों ने क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने और माइनफील्ड की पुनः मैपिंग के संकेत दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर पर्याप्त नीतिगत ध्यान नहीं दिया गया है। ड्रिफ्ट लैंडमाइन का खतरा दशकों पुराना है, फिर भी हर बरसात में सैनिक और नागरिक इसकी कीमत चुकाते हैं। सवाल यह है कि क्या सेना की माइनफील्ड मैपिंग और मानसून-पूर्व निकासी प्रोटोकॉल पर्याप्त रूप से अद्यतन हो रहे हैं, या यह त्रासदी अगले मानसून में फिर दोहराई जाएगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुंछ के मेंढर सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट कैसे हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, सेना की पेट्रोलिंग पार्टी को कांगा गली में एक लैंडमाइन मिली। विशेषज्ञ बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया, परंतु निष्क्रियीकरण के प्रयास के दौरान वह फट गई और दो सैनिक घायल हो गए।
ड्रिफ्ट लैंडमाइन क्या होती हैं और ये खतरनाक क्यों हैं?
ड्रिफ्ट लैंडमाइन वे एंटी-पर्सनल खदानें हैं जो भारी बारिश, बाढ़ या मिट्टी कटाव के कारण अपनी मूल स्थिति से खिसककर पहले सुरक्षित घोषित रास्तों पर आ जाती हैं। इससे पेट्रोलिंग सैनिकों, सीमावर्ती ग्रामीणों और मवेशियों के लिए अप्रत्याशित खतरा उत्पन्न होता है।
जम्मू-कश्मीर के किन जिलों में ड्रिफ्ट लैंडमाइन का सबसे अधिक खतरा है?
बारामूला, पुंछ और राजौरी जिले सर्वाधिक संवेदनशील हैं, जहाँ 'नो मैन्स लैंड' क्षेत्रों में घुसपैठ-रोधी ग्रिड के तहत बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं। इन्हीं इलाकों में पहले भी खिसकती खदानों से दुर्घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं।
नलवा देगवार टेरवान में क्या मिला और उसका क्या हुआ?
सड़क निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को नलवा देगवार टेरवान क्षेत्र में एक जंग लगा अविस्फोटित विस्फोटक मिला, जिसे अधिकारी हैंड ग्रेनेड मान रहे हैं। सेना के बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुँचकर उसे सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया।
घायल सैनिकों की स्थिति क्या है?
अधिकारियों के अनुसार, दोनों घायल सैनिकों को विस्फोट के तुरंत बाद आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया जहाँ उनका उपचार किया जा रहा है। उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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