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केके शैलजा का दावा: एलडीएफ केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में आएगा, एग्जिट पोल को किया खारिज

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केके शैलजा का दावा: एलडीएफ केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में आएगा, एग्जिट पोल को किया खारिज

सारांश

केके शैलजा ने साफ कहा — एग्जिट पोल गलत हैं और एलडीएफ तीसरी बार सत्ता में आएगा। ₹90,000 करोड़ के बुनियादी ढाँचे, 62 लाख परिवारों को मिली पेंशन और 5 लाख घरों के निर्माण को उन्होंने अपना सबसे बड़ा हथियार बताया। महिला मुख्यमंत्री की अटकलों को उन्होंने विनम्रता से, लेकिन दृढ़ता से खारिज किया।

मुख्य बातें

केके शैलजा ने दावा किया कि एलडीएफ केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करेगा।
केआईआईएफबी के माध्यम से ₹90,000 करोड़ से अधिक पूंजीगत खर्च किया गया।
सामाजिक कल्याण पेंशन ₹1,200 से बढ़ाकर ₹2,600 की गई; 62 लाख परिवार लाभान्वित।
एलआईएफई मिशन के तहत 5 लाख से अधिक घर बनाए गए।
शैलजा ने यूडीएफ जीत का अनुमान लगाने वाले एग्जिट पोल को खारिज किया; पिछले चुनाव में 60,000 वोटों से जीत का दिया उदाहरण।
महिला मुख्यमंत्री की अटकलों को नकारा; कहा — पार्टी पिनाराई विजयन के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है।

सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और पेरावूर विधानसभा क्षेत्र से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) उम्मीदवार केके शैलजा ने 3 मई 2026 को राष्ट्र प्रेस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में भरोसा जताया कि एलडीएफ केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करेगा। उन्होंने पिछले 10 वर्षों में हुए बुनियादी ढाँचे के विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं को अपनी पार्टी की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही, उन्होंने यूडीएफ की जीत का अनुमान लगा रहे एग्जिट पोल को सिरे से खारिज किया।

एलडीएफ की चुनावी दावेदारी

शैलजा ने कहा कि केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के माध्यम से पूंजीगत खर्च के रूप में ₹90,000 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की गई है। उन्होंने बताया कि सामाजिक कल्याण पेंशन को 2016 में ₹1,200 से बढ़ाकर ₹2,600 प्रतिमाह कर दिया गया है, जिससे करीब 62 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने एलआईएफई (आजीविका समावेशन और वित्तीय सशक्तीकरण) मिशन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 5 लाख से अधिक घर बनाए गए हैं। इसके अलावा 'हरित केरल' मिशन और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा में किए गए सुधारों को भी उन्होंने एलडीएफ की उपलब्धियों में गिनाया।

एग्जिट पोल पर सवाल

एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर शैलजा ने कहा कि वे इन भविष्यवाणियों पर अधिक भरोसा नहीं करतीं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले चुनाव में उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में एग्जिट पोल ने उनकी बेहद कम अंतर से हार का अनुमान लगाया था, जबकि वे 60,000 से अधिक वोटों से जीती थीं। उनका कहना था,

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ के बुनियादी ढाँचे का ज़मीनी असर आम मतदाता तक कितना पहुँचा है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सत्ता-विरोधी लहर की चर्चा भी है और एग्जिट पोल यूडीएफ को बढ़त दे रहे हैं। महिला मुख्यमंत्री के सवाल को शैलजा ने जिस तरह टाला, वह पार्टी अनुशासन का प्रतिबिंब है — लेकिन यह भी संकेत देता है कि नेतृत्व परिवर्तन की बहस एलडीएफ के भीतर अभी भी संवेदनशील मुद्दा है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केके शैलजा कौन हैं और वे किस सीट से चुनाव लड़ रही हैं?
केके शैलजा सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हैं, जो इस बार पेरावूर विधानसभा क्षेत्र से एलडीएफ उम्मीदवार हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उनके नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई थी।
एलडीएफ केरल में तीसरी बार जीत का दावा किस आधार पर कर रहा है?
एलडीएफ ने केआईआईएफबी के माध्यम से ₹90,000 करोड़ से अधिक के पूंजीगत खर्च, सामाजिक कल्याण पेंशन को ₹1,200 से ₹2,600 करने और 62 लाख परिवारों को लाभ पहुँचाने का हवाला दिया है। एलआईएफई मिशन के तहत 5 लाख से अधिक घर बनाना भी प्रमुख उपलब्धि बताई गई है।
केरल में एग्जिट पोल क्या कह रहे हैं और शैलजा की क्या प्रतिक्रिया है?
अधिकांश एग्जिट पोल यूडीएफ की जीत का अनुमान लगा रहे हैं। शैलजा ने इन्हें खारिज करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में उनके क्षेत्र में एग्जिट पोल ने उनकी कम अंतर से हार बताई थी, जबकि वे 60,000 से अधिक वोटों से जीती थीं।
क्या केके शैलजा केरल की मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं?
शैलजा ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा है और जीतने पर वे एमएलए के रूप में काम करेंगी। नेतृत्व संबंधी फैसले पार्टी सही समय पर लेती है।
केरल में भाजपा की स्थिति के बारे में शैलजा ने क्या कहा?
शैलजा ने कहा कि भाजपा लंबे समय से केरल में पैर जमाने की कोशिश कर रही है और इस बार बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ रही है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भाजपा कोई सीट जीत पाएगी, लेकिन नतीजों का इंतज़ार करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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